श्यामपुर निवासी एक युवक की जान एम्स ऋषिकेश के ट्रॉमा विशेषज्ञों ने बेहद जटिल सर्जरी के बाद बचा ली। युवक के दिल में नुकीली वस्तु से गहरी चोट लगी थी और अस्पताल पहुंचने पर उसका रक्तचाप काफी कम था।

मरीज को 27 अगस्त को ट्रॉमा इमरजेंसी में गंभीर हालत में भर्ती कराया गया। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने बिना देरी किए आपातकालीन ऑपरेशन का फैसला किया। इलाज के बाद उसकी हालत में लगातार सुधार हुआ और 3 सितंबर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

हार्ट-लंग मशीन के बिना हुई सर्जरी

मरीज की हालत इतनी नाजुक थी कि ऑपरेशन के दौरान हार्ट-लंग मशीन का इस्तेमाल संभव नहीं था। इसके बाद विशेषज्ञों ने धड़कते दिल पर ऑफ-पंप सर्जरी की। यह तकनीक पेनिट्रेटिंग कार्डियक इंजरी यानी दिल में गहरी चोट के मामलों में बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है।

ट्रॉमा सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. एम. क्यू. आजम ने बताया कि ऐसे मामलों में इलाज शुरू करने का समय बहुत अहम होता है। उन्होंने कहा कि मरीज की जान बचाने में डॉक्टरों के बीच तालमेल और टीमवर्क की बड़ी भूमिका रहती है।

ऑपरेशन करने वाले ट्रॉमा सर्जन डॉ. नीरज सिंह के अनुसार, युवक की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल लाइफ-सेविंग सर्जरी के लिए ले जाया गया। धड़कते दिल के साथ प्रक्रिया पूरी करना तकनीकी रूप से कठिन और जोखिमभरा था, लेकिन सामूहिक प्रयास से सर्जरी सफल रही।

6 दिन निगरानी में रखा गया

ऑपरेशन के बाद युवक को 6 दिनों तक गहन चिकित्सा और विशेष निगरानी में रखा गया। उपचार के दौरान उसकी स्थिति लगातार बेहतर हुई। स्वस्थ होने के बाद उसे 3 सितंबर को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

इस सर्जरी में ट्रॉमा टीम से डॉ. नीरज कुमार, डॉ. एकता, डॉ. रुशल और डॉ. गर्वित शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. प्रवीण तलवार, डॉ. संदीप और डॉ. मिन्हाज ने अहम भूमिका निभाई।

निष्कर्ष

दिल में गहरी चोट के बावजूद युवक को समय पर आपातकालीन उपचार मिला। एम्स ऋषिकेश की टीम ने हार्ट-लंग मशीन के बिना धड़कते दिल की जटिल सर्जरी कर उसे स्वस्थ होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. युवक को एम्स ऋषिकेश कब भर्ती कराया गया?

उसे 27 अगस्त को गंभीर हालत में ट्रॉमा इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था।

Q. युवक को किस तरह की चोट लगी थी?

उसके दिल में नुकीली वस्तु से गहरी चोट लगी थी। इसे पेनिट्रेटिंग कार्डियक इंजरी कहा गया है।

Q. ऑफ-पंप सर्जरी क्या होती है?

इस सर्जरी में हार्ट-लंग मशीन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। मामले में ऑपरेशन धड़कते दिल के साथ किया गया।

Q. मरीज को अस्पताल से कब छुट्टी मिली?

उपचार और 6 दिन की निगरानी के बाद उसे 3 सितंबर को छुट्टी दी गई।

Q. सर्जरी में कौन-सी टीम शामिल थी?

ट्रॉमा टीम में डॉ. नीरज कुमार, डॉ. एकता, डॉ. रुशल और डॉ. गर्वित शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. प्रवीण तलवार, डॉ. संदीप और डॉ. मिन्हाज ने भूमिका निभाई।