अल्मोड़ा में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने अंकिता हत्याकांड से जुड़े कथित संदिग्ध वीआईपी को राज्यपाल बनाए जाने के फैसले का विरोध किया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि इस नियुक्ति से उत्तराखंड की जनता की भावनाएं आहत हुई हैं।
उपपा के संयोजक पीसी तिवारी और प्रधान महासचिव नरेश नौड़ियाल ने केंद्र सरकार के फैसले की निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में इस नियुक्ति का लगातार विरोध होने के बावजूद जनता की भावनाओं को नजरअंदाज किया गया। नेताओं ने इसे उत्तराखंड के घावों पर नमक छिड़कने जैसा बताया।
पार्टी नेताओं के अनुसार, भाजपा के आंतरिक सूत्रों से कथित वीआईपी का नाम सामने आने के बाद प्रदेश सरकार ने मामले में सीबीआई जांच की बात कही थी। उनका आरोप है कि अब उसी संदिग्ध व्यक्ति को संवैधानिक पद पर नियुक्त कर दिया गया है।
उपपा ने इस घटनाक्रम की तुलना मुजफ्फरनगर कांड से की। नेताओं ने आरोप लगाया कि इस मामले में भी दोषियों को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में नियुक्त व्यक्ति का नाम या किसी अदालत के फैसले का उल्लेख नहीं है।
सरकार से रुख स्पष्ट करने की मांग
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने सरकार से इस नियुक्ति पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की है। पार्टी नेताओं ने कहा कि जनता की भावनाओं से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार को स्थिति साफ करनी चाहिए।
पीसी तिवारी और नरेश नौड़ियाल ने चेतावनी दी कि उपपा इस नीति के खिलाफ अपना लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेगी। पार्टी ने अपने विरोध को अंकिता हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी की नियुक्ति के मुद्दे तक सीमित रखा है।
निष्कर्ष
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने अंकिता हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी की राज्यपाल नियुक्ति का विरोध करते हुए सरकार से जवाब मांगा है। पार्टी ने कहा है कि वह इस फैसले के खिलाफ लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी ने किस फैसले का विरोध किया है?
पार्टी ने अंकिता हत्याकांड से जुड़े कथित संदिग्ध वीआईपी को राज्यपाल बनाए जाने के फैसले का विरोध किया है।
Q. इस मुद्दे पर उपपा की ओर से किन नेताओं ने बयान दिया?
उपपा के संयोजक पीसी तिवारी और प्रधान महासचिव नरेश नौड़ियाल ने पार्टी का पक्ष रखा।
Q. पार्टी ने केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाया?
पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने उत्तराखंड की जनता की भावनाओं की अनदेखी की।
Q. उपपा ने सरकार से क्या मांग की है?
पार्टी ने सरकार से इस नियुक्ति पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की है।
Q. उपपा ने आगे क्या कहा है?
पार्टी नेताओं ने कहा कि वह इस नीति के खिलाफ अपना लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेगी।









