उत्तराखंड के पहाड़ी किसानों और बागवानों के उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने की कोशिश के तहत देहरादून में सेब महोत्सव 3.0 शुरू हुआ। नाबार्ड की ओर से आयोजित इस महोत्सव का शुभारंभ मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने किया। यहां सेब की कई प्रजातियों के साथ कीवी, सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद प्रदर्शित किए गए।
मुख्य सचिव ने कहा कि किसान उत्पादक संगठनों यानी FPO की भूमिका केवल किसानों को एक मंच पर लाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इन्हें मजबूत और आत्मनिर्भर संस्थानों के रूप में विकसित करना जरूरी है, ताकि वे लंबे समय तक किसानों के हित में काम कर सकें।
उन्होंने FPO के लिए लगातार प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, क्षमता विकास और जरूरी सुविधाओं की जरूरत बताई। उनके अनुसार, मजबूत FPO छोटे और सीमांत किसानों को मिलकर उत्पाद खरीदने, बेचने और बाजार तक पहुंच बनाने में मदद कर सकते हैं। इससे किसानों को उचित कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी।
खरीद, ब्रांडिंग और भंडारण पर जोर
मुख्य सचिव ने कृषि और बागवानी उत्पादों की खरीद, विपणन और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों की अलग पहचान है, लेकिन बड़े बाजार तक पहुंच बनाने के लिए गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग की मजबूत व्यवस्था जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों से किसानों के उत्पादों को केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रखने को कहा। बेहतर कीमत और व्यापक बाजार से जोड़ने के लिए ठोस रणनीति तैयार करने पर भी जोर दिया गया।
फल और सब्जियों के लिए भंडारण की कमी किसानों की बड़ी मुश्किलों में शामिल है। मुख्य सचिव ने शीत भंडारण यानी कोल्ड स्टोरेज नेटवर्क मजबूत करने की बात कही। पर्याप्त सुविधा नहीं होने पर किसान कई बार उत्पाद जल्दी बेचने को मजबूर होते हैं और उन्हें अपेक्षित कीमत नहीं मिल पाती।
उन्होंने ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया, जिसमें किसान उत्पादों को सुरक्षित रख सकें और बाजार की स्थिति के अनुसार सही समय पर बिक्री कर सकें।
उत्पाद की जानकारी और जैविक प्रमाणन
मुख्य सचिव ने कृषि उत्पादों की ट्रेसेबिलिटी व्यवस्था विकसित करने को कहा। इसके तहत यह जानकारी उपलब्ध हो सकेगी कि उत्पाद कहां पैदा हुआ, वह किस किसान या FPO से आया और उसकी गुणवत्ता क्या है।
उन्होंने जैविक उत्पादों के लिए ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को भी बढ़ावा देने के निर्देश दिए। इससे उत्तराखंड के जैविक उत्पादों को बाजार में अलग पहचान मिलने और किसानों को बेहतर कीमत दिलाने में मदद मिल सकती है।
नाबार्ड और सरकार के बीच तालमेल की जरूरत
मुख्य सचिव ने कहा कि FPO को मजबूत बनाने के लिए नाबार्ड और राज्य सरकार की योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। सरकार, नाबार्ड, संबंधित विभागों, FPO, किसानों और अन्य भागीदारों को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने उपलब्ध योजनाओं और संसाधनों को आपस में जोड़कर किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया। उनके अनुसार, इससे योजनाओं का वास्तविक लाभ जमीन पर दिखाई दे सकेगा और उत्पादन से बाजार तक किसानों को बेहतर प्लेटफॉर्म मिल पाएगा।
मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखंड में कृषि और बागवानी की व्यापक संभावनाएं हैं। सेब, कीवी, सब्जियों और अन्य स्थानीय उत्पादों को बाजार, ब्रांडिंग और भंडारण से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
महोत्सव के दौरान उन्होंने विभिन्न स्टॉल का दौरा किया और किसानों तथा FPO प्रतिनिधियों से उत्पादों की गुणवत्ता, उत्पादन और बाजार से जुड़ी चुनौतियों की जानकारी ली। कार्यक्रम में सचिव डॉ. एसएन पाण्डेय, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक पंकज यादव, महाप्रबंधक शशि कुमार और नाबार्ड के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
निष्कर्ष
सेब महोत्सव 3.0 में उत्तराखंड के पहाड़ी उत्पादों को बेहतर बाजार से जोड़ने की दिशा पर जोर दिया गया। FPO को मजबूत करना, कोल्ड स्टोरेज बढ़ाना, ब्रांडिंग सुधारना और उत्पादों की जानकारी उपलब्ध कराना इस प्रयास के प्रमुख हिस्से हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. सेब महोत्सव 3.0 कहां शुरू हुआ?
देहरादून में सेब महोत्सव 3.0 का शुभारंभ हुआ। इसका आयोजन नाबार्ड की ओर से किया गया।
Q. महोत्सव का शुभारंभ किसने किया?
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने महोत्सव का शुभारंभ किया।
Q. FPO को मजबूत बनाने पर क्यों जोर दिया गया?
मजबूत FPO छोटे और सीमांत किसानों को सामूहिक खरीद, बिक्री और बाजार तक पहुंच में मदद कर सकते हैं।
Q. महोत्सव में कौन-कौन से उत्पाद प्रदर्शित किए गए?
महोत्सव में सेब की कई प्रजातियों के साथ कीवी, सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद प्रदर्शित किए गए।
Q. किसानों के लिए कोल्ड स्टोरेज क्यों जरूरी है?
भंडारण की सुविधा मिलने से किसान उत्पादों को सुरक्षित रख सकते हैं और बाजार की स्थिति के अनुसार बिक्री कर सकते हैं।
Q. ट्रेसेबिलिटी व्यवस्था में क्या जानकारी मिलेगी?
इस व्यवस्था से उत्पाद के उत्पादन स्थल, किसान या FPO और उसकी गुणवत्ता की जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।









