उत्तराखंड में इन दिनों भालुओं के आबादी वाले इलाकों में पहुंचने और हमले की घटनाएं बढ़ रही हैं। चमोली और उत्तरकाशी जिलों में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। वन विभाग ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने और लोगों को सतर्क करने के निर्देश दिए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, शीतनिद्रा यानी हाइबरनेशन में जाने से पहले भालू अपने शरीर में चर्बी बढ़ाते हैं। इससे शीतनिद्रा के दौरान उनके शरीर को ऊर्जा मिलती रहती है। इसी वजह से वे जंगल के साथ आबादी वाले क्षेत्रों में भी भोजन की तलाश करते हैं।
भारतीय वन्यजीव संस्थान के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक सत्य कुमार ने बताया कि हाइबरनेशन से पहले भालू शरीर में चर्बी बढ़ाते हैं। इसके लिए वे जंगल से लेकर आबादी तक उन जगहों पर पहुंचते हैं, जहां उन्हें खाना मिल सकता है। उन्होंने अक्तूबर को इस लिहाज से अहम महीना बताया और लोगों से सचेत रहने की अपील की।
किन महीनों में बढ़ता है भालुओं का मूवमेंट
अपर प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव विवेक पांडे के अनुसार, सितंबर से नवंबर और फरवरी में भालुओं का मूवमेंट बढ़ जाता है। इस दौरान वे भोजन की तलाश में आबादी की ओर आते हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ जाता है।
भालुओं के आबादी तक पहुंचने की एक वजह वहां जमा कूड़ा भी है। आबादी के पास लगे कूड़े के ढेरों में भोजन मिलने की संभावना के कारण भालू इन जगहों तक पहुंच सकते हैं। इसलिए केवल जंगलों में निगरानी बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आबादी के आसपास सफाई पर भी ध्यान देने की जरूरत है।
वन विभाग ने दिए ये निर्देश
वन मुख्यालय ने वनाधिकारियों को संवेदनशील जगहों पर गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही भालुओं की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैप लगाने और लोगों को जागरूक करने को कहा गया है।
आबादी के पास मौजूद कूड़े के ढेरों को हटाने और सफाई कराने के लिए जिला प्रशासन का सहयोग लेने के निर्देश भी दिए गए हैं। विभाग का मानना है कि सामुदायिक स्तर पर किए जाने वाले प्रयास मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा कम करने में मदद कर सकते हैं।
लोगों के लिए इस अवधि में सतर्क रहना जरूरी है, क्योंकि भोजन की तलाश में भालू जंगल से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों में आ सकते हैं। वन विभाग ने गश्त, कैमरा ट्रैप और जागरूकता अभियान जैसे कदमों के जरिए ऐसे इलाकों पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी की है।
निष्कर्ष
हाइबरनेशन से पहले शरीर में चर्बी बढ़ाने के लिए भालुओं की भोजन तलाश आबादी तक पहुंच रही है। चमोली और उत्तरकाशी में घटनाओं के बाद वन विभाग ने गश्त, कैमरा ट्रैप, जागरूकता और कूड़ा सफाई पर जोर दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. उत्तराखंड में भालू आबादी वाले इलाकों में क्यों आ रहे हैं?
हाइबरनेशन से पहले भालू शरीर में चर्बी बढ़ाने के लिए भोजन की तलाश करते हैं। इसी दौरान वे आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचते हैं।
Q. भालुओं का मूवमेंट किन महीनों में बढ़ता है?
विवेक पांडे के अनुसार, सितंबर से नवंबर और फरवरी में भालुओं का मूवमेंट बढ़ जाता है।
Q. किन जिलों में भालू से जुड़ी घटनाएं हुई हैं?
चमोली और उत्तरकाशी जिलों में भालुओं के आबादी क्षेत्र में पहुंचने और हमले की घटनाएं हो चुकी हैं।
Q. वन विभाग ने क्या कदम उठाने को कहा है?
वनाधिकारियों को संवेदनशील जगहों पर गश्त बढ़ाने, कैमरा ट्रैप लगाने और लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।
Q. आबादी के पास कूड़े की सफाई क्यों जरूरी है?
कूड़े के ढेरों में भोजन मिलने की संभावना के कारण भालू आबादी के पास पहुंचते हैं। इसलिए जिला प्रशासन के सहयोग से सफाई कराने के निर्देश दिए गए हैं।










