देहरादून में उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने मतदाता सूची के SIR (Systematic Integration of Records) की अंतिम जानकारी पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग को पहले 2022 की स्थिति और उसके बाद हटाए गए नामों का पूरा हिसाब सार्वजनिक करना चाहिए।

धस्माना के मुताबिक, उत्तराखंड में PSIR और SIR की प्रक्रिया के बाद करीब 12.5 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। उन्होंने मांग की कि इन हटाए गए मतदाताओं का विधानसभा क्षेत्रवार विवरण सभी राजनीतिक दलों और आम लोगों के सामने रखा जाए।

अधिकारों के केंद्रीकरण पर आपत्ति

कांग्रेस नेता ने कहा कि Forms 6 और 7 से जुड़े कामों में पहले बूथ लेवल ऑफिसर, इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर और मुख्य निर्वाचन अधिकारी स्तर के अधिकारियों की भूमिका थी। उनके दावे के अनुसार, SIR के दौरान नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार राज्य स्तर से लेकर दिल्ली में केंद्रित कर दिया गया।

धस्माना ने इस व्यवस्था को असंवैधानिक और गैरकानूनी बताया। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आरोप है। उपलब्ध बयान में इस संबंध में किसी न्यायिक फैसले या अलग आधिकारिक निष्कर्ष की जानकारी नहीं दी गई है।

उन्होंने शिकायतकर्ता के भौतिक सत्यापन और झूठी शिकायत मिलने पर दंड से जुड़े प्रावधान हटाए जाने का भी दावा किया। धस्माना ने कहा कि इस मुद्दे पर निर्वाचन आयोग की ओर से पर्याप्त जवाब नहीं आया।

2 निर्वाचन आयुक्तों की आपत्तियों का मुद्दा

धस्माना ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने SIR को लेकर निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से उठाए गए 14 असहमति बिंदुओं का प्रभावी खंडन नहीं किया। उनके अनुसार, आयोग की बाद की कार्रवाई से इन आपत्तियों को स्वीकार किए जाने का संकेत मिलता है।

यह भी धस्माना का आकलन है। उपलब्ध सामग्री में आयोग की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया या लिखित स्पष्टीकरण शामिल नहीं है।

कांग्रेस नेता ने SIR की प्रक्रिया को अमान्य और गैरकानूनी बताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में अंतिम सूची या अंतिम डेटा को स्वीकार करना मुश्किल है। उन्होंने आयोग से पहले यह स्पष्ट करने को कहा कि 2022 के मुकाबले मतदाता संख्या और नामों में क्या बदलाव हुआ।

वैध और अवैध मतों को लेकर मांग

धस्माना ने कहा कि किसी भी वैध और पात्र मतदाता का नाम हटने नहीं दिया जाएगा। साथ ही, उन्होंने अवैध मतों को सूची में शामिल नहीं करने की बात कही।

उन्होंने कहा कि जब तक हटाए गए नामों का विधानसभा क्षेत्रवार विवरण सार्वजनिक नहीं होता और 2022 की स्थिति पर स्पष्टीकरण नहीं मिलता, तब तक कांग्रेस का आंदोलन जारी रहेगा।

निष्कर्ष

कांग्रेस ने SIR की अंतिम जानकारी पर पारदर्शिता की मांग की है। उसका मुख्य जोर 2022 के आंकड़ों से तुलना, हटाए गए मतदाताओं का क्षेत्रवार विवरण और वैध मतों की सुरक्षा पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. SIR का मतलब क्या है?

SIR का मतलब Systematic Integration of Records है। यह मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया के रूप में बयान में वर्णित है।

Q. SIR को लेकर सवाल किसने उठाए हैं?

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने इस पर आपत्ति जताई है।

Q. उत्तराखंड में कितने नाम हटने का दावा किया गया है?

धस्माना ने PSIR और SIR के बाद करीब 12.5 लाख नाम हटने का दावा किया है।

Q. कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से क्या जानकारी मांगी है?

कांग्रेस ने हटाए गए मतदाताओं का विधानसभा क्षेत्रवार विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।

Q. आंदोलन को लेकर धस्माना ने क्या कहा?

उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।