देहरादून में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुटखा और पान मसाला पर लागू एक साल के प्रतिबंध को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि इस फैसले की हर वर्ष समीक्षा की जाती है और समीक्षा के बाद इन पदार्थों पर रोक जरूरी मानी जाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशीले पदार्थों और लत के नुकसान आज सभी के सामने स्पष्ट हैं। उनके मुताबिक, इन पदार्थों के इस्तेमाल को जितना संभव हो सके, उतना सीमित किया जाना चाहिए। उन्होंने इसे युवाओं को नशे की दिशा में जाने से रोकने से जोड़ा।
हर वर्ष होती है समीक्षा
पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि गुटखा और पान मसाला पर प्रतिबंध की स्थिति की हर साल समीक्षा की जाती है। उन्होंने कहा कि समीक्षा के बाद सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि इन पदार्थों पर रोक जारी रहनी चाहिए।
फ्री प्रेस जर्नल की 13 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में भी उत्तराखंड में तंबाकू या निकोटीन वाले गुटखा और पान मसाला पर एक साल के प्रतिबंध की जानकारी दी गई है। मुख्यमंत्री के बयान में इस नीति को सरकार की कार्रवाई और जागरूकता, दोनों से आगे बढ़ाने की बात कही गई।
युवाओं को लेकर चिंता
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे की लत देश की युवा पीढ़ी को गलत दिशा में ले जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस लक्ष्य और संकल्प का भी उल्लेख किया, जिसमें युवाओं को नशे के प्रभाव से बचाने की बात कही गई है।
धामी ने चेतावनी दी कि अगर युवा पीढ़ी गलत दिशा में आगे बढ़ती है, तो इसका देश के भविष्य पर बड़ा असर पड़ेगा। इसी वजह से उन्होंने नशीले पदार्थों पर रोक को युवाओं की सुरक्षा से जोड़कर देखा।
जागरूकता और सरकारी कार्रवाई पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को देवभूमि के रूप में पहचाना जाता है। उनके अनुसार, राज्य में नशे के खिलाफ काम केवल सरकारी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा। इसके साथ लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।
बयान से स्पष्ट है कि राज्य सरकार गुटखा और पान मसाला पर प्रतिबंध को नियमित समीक्षा के साथ जारी रखने की दिशा में काम कर रही है। सरकार का घोषित फोकस इन पदार्थों की पहुंच सीमित करना और युवाओं को नशे से दूर रखना है।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुटखा और पान मसाला पर एक साल के प्रतिबंध को हर वर्ष समीक्षा से जुड़ा फैसला बताया। उन्होंने नशे के नुकसान, सरकारी कार्रवाई और जागरूकता के जरिए युवाओं को बचाने को सरकार का मुख्य लक्ष्य बताया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. उत्तराखंड में किस पर एक साल का प्रतिबंध है?
गुटखा और पान मसाला पर एक साल का प्रतिबंध लागू है। फ्री प्रेस जर्नल ने तंबाकू या निकोटीन वाले उत्पादों का भी उल्लेख किया है।
Q. प्रतिबंध की समीक्षा कितनी बार होती है?
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रतिबंध की समीक्षा हर वर्ष की जाती है।
Q. समीक्षा के बाद सरकार का रुख क्या रहता है?
मुख्यमंत्री ने कहा कि समीक्षा के बाद इन पदार्थों पर रोक जरूरी मानी जाती है।
Q. सरकार प्रतिबंध के साथ और क्या कदम उठाएगी?
मुख्यमंत्री ने जागरूकता और सरकारी कार्रवाई, दोनों के जरिए इस काम को आगे बढ़ाने की बात कही।
Q. इस नीति का मुख्य लक्ष्य क्या है?
मुख्य लक्ष्य युवाओं को नशे और लत के प्रभाव से बचाना है।












