रुद्रपुर। ऊधमसिंह नगर के ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में हिंदी पढ़ने की बुनियादी दक्षता को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई है। असर (वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट) के अनुसार कक्षा 3 से 5 तक के 68.8% बच्चे दूसरी कक्षा के स्तर का सरल हिंदी पाठ नहीं पढ़ पा रहे हैं। इस आयु वर्ग में केवल 31.2% बच्चे ही ऐसा पाठ पढ़ सके।
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि कई बच्चे तीसरी से पांचवीं कक्षा तक पहुंचने के बाद भी हिंदी पढ़ने की शुरुआती क्षमता हासिल नहीं कर पाए हैं। यह स्थिति केवल छोटे बच्चों तक सीमित नहीं है। कक्षा 6 से 8 तक के 63.2% बच्चे दूसरी कक्षा के स्तर का हिंदी पाठ पढ़ पाए, जबकि 36.8% बच्चे इस स्तर तक नहीं पहुंच सके।
पढ़ने की कमजोरी का दूसरे विषयों पर असर
हिंदी पढ़ने में परेशानी होने पर बच्चों को दूसरे विषयों की पढ़ाई में भी मुश्किल आती है। सवाल को सही ढंग से पढ़कर उसका अर्थ समझना कठिन होने पर बच्चा जवाब जानते हुए भी उसे हल नहीं कर पाता। इसलिए केवल पाठ याद कराने के बजाय पढ़ने की बुनियादी क्षमता पर नियमित काम करने की जरूरत है।
शब्दों की पहचान, वाक्य पढ़ने और अर्थ समझने का अभ्यास बच्चों की प्रगति में मदद कर सकता है। शिक्षकों को यह पहचानना जरूरी है कि बच्चा अक्षर, मात्रा, शब्द, वाक्य या छोटे अनुच्छेद में से किस स्तर पर अटक रहा है।
नियमित आकलन से कमजोर बच्चों की पहचान
कक्षा में नियमित आकलन के जरिए बच्चों की पढ़ने की क्षमता का स्तर जाना जा सकता है। इसमें अक्षर और मात्राओं की पहचान से लेकर शब्द, वाक्य और छोटे अनुच्छेद पढ़ने तक की जांच शामिल हो सकती है। इससे शिक्षकों को कमजोर बच्चों की जरूरत समझने और उनके लिए अलग अभ्यास कराने में मदद मिलेगी।
इस तरह के आकलन से बच्चों को एक ही तरीके से पढ़ाने के बजाय उनकी जरूरत के अनुसार अभ्यास कराया जा सकेगा। स्रोत सामग्री में यह भी बताया गया है कि पढ़ने की दक्षता बढ़ाने के लिए नियमित अभ्यास जरूरी है।
पढ़ाई में लापरवाही पर कार्रवाई
बच्चों की हिंदी पढ़ने की क्षमता को लेकर पहले भी स्कूलों में कार्रवाई हो चुकी है। 22 अगस्त को रुद्रपुर, खटीमा और सितारगंज के राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा 4 और 5 के बच्चे हिंदी नहीं पढ़ पाए थे। इसके बाद सीईओ ने शिक्षकों का वेतन रोक दिया था।
एक अन्य मामले में 1 अगस्त को प्राथमिक विद्यालय पैगा में कक्षा 4 और 5 के बच्चे हिंदी नहीं पढ़ पाए थे। इसके बाद 10 शिक्षकों का वेतन रोकने के साथ प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया गया था।
ऊधमसिंह नगर के सीईओ हरेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि शिक्षकों को बच्चों की पढ़ाई और दक्षता बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पढ़ाई में लापरवाही पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।
निष्कर्ष
असर रिपोर्ट के अनुसार ऊधमसिंह नगर के ग्रामीण सरकारी स्कूलों में कक्षा 3 से 5 तक के 68.8% बच्चे दूसरी कक्षा के स्तर का सरल हिंदी पाठ नहीं पढ़ पा रहे हैं। कक्षा 6 से 8 में भी 36.8% बच्चे इस स्तर तक नहीं पहुंच सके। नियमित आकलन, अलग अभ्यास और शिक्षकों की निगरानी को इस स्थिति में सुधार के जरूरी कदम बताया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. असर रिपोर्ट में ऊधमसिंह नगर के बच्चों के बारे में क्या सामने आया?
कक्षा 3 से 5 तक के 68.8% बच्चे दूसरी कक्षा के स्तर का सरल हिंदी पाठ नहीं पढ़ पाए। केवल 31.2% बच्चे यह पाठ पढ़ सके।
Q. कक्षा 6 से 8 के बच्चों की स्थिति कैसी रही?
कक्षा 6 से 8 तक के 63.2% बच्चे दूसरी कक्षा के स्तर का हिंदी पाठ पढ़ पाए। 36.8% बच्चे इस स्तर तक नहीं पहुंच सके।
Q. हिंदी पढ़ने में कमजोरी से बच्चों को क्या परेशानी हो सकती है?
सवाल पढ़ने और उसका अर्थ समझने में दिक्कत हो सकती है। इससे जवाब जानते हुए भी बच्चा उसे हल नहीं कर पाता।
Q. बच्चों की पढ़ने की क्षमता सुधारने के लिए क्या जरूरी बताया गया है?
शब्द पहचान, वाक्य पढ़ने और अर्थ समझने का नियमित अभ्यास जरूरी बताया गया है। बच्चे के स्तर के अनुसार अलग अभ्यास भी कराया जा सकता है।
Q. बच्चों की पढ़ने की दक्षता कैसे जांची जा सकती है?
अक्षर और मात्राओं की पहचान से लेकर शब्द, वाक्य और छोटे अनुच्छेद पढ़ने तक नियमित आकलन किया जा सकता है।
Q. पढ़ाई में लापरवाही पर क्या कार्रवाई हुई?
कुछ मामलों में शिक्षकों का वेतन रोका गया। प्राथमिक विद्यालय पैगा के मामले में प्रधानाध्यापक को निलंबित भी किया गया।
Q. ऊधमसिंह नगर के सीईओ ने क्या कहा?
सीईओ हरेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा कि शिक्षकों को बच्चों की पढ़ाई और दक्षता बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। पढ़ाई में लापरवाही पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।









