पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्र में 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश में पहली बार जाम की स्थिति सामने आई है। वाहनों की लंबी कतारों के कारण श्रद्धालुओं को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश आने के बाद इस धार्मिक स्थल को दुनिया भर में नई पहचान मिली। इसके बाद यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ी है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में 10,079 और 2024 में 29,423 यात्री आदि कैलाश पहुंचे। 2025 में देश के अलग-अलग हिस्सों से 31,558 यात्रियों ने दर्शन किए। इस साल अब तक 61,950 इनर लाइन परमिट जारी किए जा चुके हैं।

बर्फबारी से सड़क हुई संकरी

आदि कैलाश क्षेत्र में हाल में भारी बर्फबारी हुई थी। सड़क पर 3 से 4 फीट तक बर्फ जम गई थी। सीमा सड़क संगठन ने जेसीबी की मदद से बर्फ हटाकर आवाजाही शुरू कराई, लेकिन सड़क किनारे जमा बर्फ के कारण मार्ग की चौड़ाई कम हो गई। इससे जाम की समस्या और बढ़ गई।

आदि कैलाश मार्ग चीन सीमा तक पहुंच के लिए भी महत्वपूर्ण है। पर्यटन और सामरिक महत्व वाले इस रास्ते को सीमा सड़क संगठन ने बेहतर बनाया है। डामरीकरण के बाद वाहनों की आवाजाही आसान हुई, जिससे यहां आने वाले यात्रियों की संख्या और वाहनों का दबाव बढ़ा है।

हालांकि, ऐलागाड़, कुलागाड़, एस बैंड और मलघाट समेत कई जगहों पर बने डेंजर जोन अब भी यात्रियों के लिए चुनौती बने हुए हैं। बढ़ते यातायात के कारण आदि कैलाश में जाम की स्थिति ने शासन-प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।