हरिद्वार के नारायणी शिला मंदिर में तर्पण और श्राद्ध के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। मंदिर में अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक अनुष्ठान करने, पूजा करने और आशीर्वाद लेने आए लोगों की भीड़ से दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गई हैं।
सिटी सीओ हरिद्वार शिशुपाल सिंह नेगी के अनुसार, मंदिर के कपाट देर रात से खुले हुए हैं। श्रद्धालु सुबह जल्दी मंदिर पहुंचने लगे और अपने पितरों के लिए तर्पण तथा श्राद्ध की रस्में पूरी कर रहे हैं।
नारायणी शिला मंदिर में भीड़ बढ़ने के कारण दर्शन के लिए इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं की कतारें लंबी हो गई हैं। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में लोग पूजा और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए मौजूद हैं।
पुलिस और मंदिर प्रशासन ने संभाली व्यवस्था
श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती रात और दिन, दोनों समय की गई है। पुलिसकर्मी कतारों और मंदिर के आसपास की व्यवस्था संभाल रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही व्यवस्थित बनी रहे।
मंदिर प्रशासन के स्वयंसेवक भी व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे हैं। वे श्रद्धालुओं की मदद कर रहे हैं और मंदिर परिसर में चल रही व्यवस्था को संभालने में पुलिस का साथ दे रहे हैं।
मंदिर में आने वाले श्रद्धालु अपने पूर्वजों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर रहे हैं। इसके साथ ही वे पूजा-अर्चना और दर्शन के जरिए आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं।
10 अक्टूबर 2026 की जानकारी के अनुसार, मंदिर के कपाट पहले ही खोल दिए गए थे और सुबह से श्रद्धालुओं की मौजूदगी बनी हुई थी। भीड़ कम होने या कतारें समाप्त होने को लेकर कोई अपडेट की जानकारी अभी नहीं है।
निष्कर्ष
हरिद्वार के नारायणी शिला मंदिर में तर्पण और श्राद्ध के लिए बड़ी भीड़ जुटी है। मंदिर के कपाट देर रात से खुले हैं, जबकि पुलिस और मंदिर प्रशासन के स्वयंसेवक श्रद्धालुओं की कतारों और अन्य व्यवस्थाओं को संभाल रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. श्रद्धालु किस मंदिर में पहुंचे हैं?
नारायणी शिला मंदिर, हरिद्वार में श्रद्धालु तर्पण और श्राद्ध के लिए पहुंचे हैं।
Q. श्रद्धालु मंदिर में क्यों आए हैं?
वे अपने पूर्वजों के लिए तर्पण और श्राद्ध करने, पूजा करने और आशीर्वाद लेने आए हैं।
Q. मंदिर के कपाट कब से खुले हैं?
मंदिर के कपाट देर रात से खुले हुए हैं।
Q. मंदिर में अभी कैसी स्थिति है?
मंदिर में बड़ी भीड़ जुटी है और दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी हैं।
Q. भीड़ संभालने के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
पुलिसकर्मियों की रात और दिन तैनाती की गई है। मंदिर प्रशासन के स्वयंसेवक भी व्यवस्था में मदद कर रहे हैं।













