देहरादून के खाराखेत गांव में 20 अप्रैल 1930 को स्वतंत्रता आंदोलन का ऐसा अध्याय लिखा गया, जिसमें नून नदी का नमकीन पानी अंग्रेजी शासन के खिलाफ प्रतिरोध का माध्यम बना। सेनानियों ने नदी के किनारे नमक तैयार किया और ब्रिटिश सरकार के उस कानून को चुनौती दी, जिसके तहत नमक बनाने और बेचने पर सरकारी नियंत्रण था।
यह गांव देहरादून से करीब 20 किलोमीटर दूर है। दांडी में समुद्र के पानी से नमक बनाने का आंदोलन हुआ था, जबकि खाराखेत में समुद्र से दूर नदी के हल्के नमकीन पानी का इस्तेमाल किया गया। यही बात इस स्थानीय सत्याग्रह को देहरादून के स्वतंत्रता आंदोलन की अलग पहचान देती है। शोध और स्थानीय इतिहास से जुड़े लेखों में इसे क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटना बताया गया है।
नदी से शहर तक पहुंचा आंदोलन
खाराखेत में तैयार नमक को देहरादून शहर लाया जाता था। कचहरी के पास, वर्तमान तहसील चौक/टाउन हॉल क्षेत्र में इसकी सार्वजनिक नीलामी होती थी। इस तरह विरोध केवल नमक बनाने तक सीमित नहीं रहा। उसकी नीलामी के जरिए भी ब्रिटिश शासन को खुली चुनौती दी गई।
खाराखेत का सत्याग्रह किसी एक दिन या एक जत्थे तक सीमित नहीं था। अलग-अलग समूहों में सेनानी यहां पहुंचे और आंदोलन को आगे बढ़ाया। खड़क बहादुर थापा, महावीर त्यागी, उल्लास वर्मा, नरदेव शास्त्री और कृष्ण दत्त वैद्य समेत कई लोगों की इसमें भागीदारी बताई जाती है।
नाम में भी जुड़ी है नमक की पहचान
खाराखेत नाम को स्थानीय भूगोल से जोड़कर देखा जाता है। ‘खारा’ शब्द नमकीनपन का संकेत देता है और गांव के पास बहने वाली नून नदी के पानी में नमक की मात्रा थी। 1930 में इसी प्राकृतिक विशेषता को औपनिवेशिक नमक कानून के विरोध का आधार बनाया गया।
नमक कानून के खिलाफ गतिविधियां केवल देहरादून तक नहीं रहीं। कुमाऊं के अल्मोड़ा क्षेत्र के पास साल्ट इलाके में रामगंगा नदी के किनारे भी इसी कानून का विरोध हुआ था। उपलब्ध विवरणों में वहां भगीरथ पांडे जैसे नेताओं के नेतृत्व का उल्लेख मिलता है।
स्मारक पर दर्ज हैं आंदोलन से जुड़े नाम
नून नदी के किनारे उस घटना की याद में एक स्मारक बनाया गया है। वहां महात्मा गांधी के साथ कई स्वतंत्रता सेनानियों के नाम दर्ज हैं। इनमें पंडित नरदेव शास्त्री, महावीर त्यागी और पंडित नारायण दत्त डंगवाल के नाम शामिल हैं।
स्मारक पर हुकुम सिंह, अमर सिंह, रीठा सिंह, धनपति, रणवीर सिंह, कृष्ण दत्त वैद्य, नारायण दत्त, दाना सिंह, श्रीकृष्ण, नाथूराम, ध्रुव सिंह और किशन लाल के नाम भी लिखे हैं। इसके अलावा गौतम चंद चौधरी, बिहारी स्वामी, विचार आनंद, हुलास वर्मा, रामस्वरूप, नैन सिंह और किरण चंद का नाम भी वहां दर्ज है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, स्वतंत्रता सेनानियों की याद में आज भी इस स्थल पर झंडारोहण किया जाता है। स्मारक खाराखेत और आसपास के गांवों की उस भागीदारी को सामने लाता है, जो आजादी की लड़ाई के दौरान देहरादून क्षेत्र में हुई थी।
दस्तावेजों और आयोजनों से जुड़ी रही याद
उत्तराखंड राज्य अभिलेखागार ने 2015 में खाराखेत में नमक सत्याग्रह की 85वीं वर्षगांठ पर कार्यक्रम आयोजित किया था। इस मौके पर अप्रैल-मई 1930 के आंदोलन से जुड़े दस्तावेज, पत्राचार और कानूनी फैसलों की प्रदर्शनी लगाई गई। उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक, इससे पहले इस घटना की याद में बड़ा आयोजन 1983 में हुआ था।
मार्च 2026 में खाराखेत सेनानी स्मारक पर स्वतंत्रता सेनानियों की याद में पौधरोपण कार्यक्रम भी हुआ। इसमें स्वतंत्रता सेनानी परिवारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इससे पता चलता है कि स्थानीय स्तर पर इस स्थल के साथ जुड़ाव बना हुआ है।
निष्कर्ष
खाराखेत का नमक सत्याग्रह बताता है कि 1930 में स्वतंत्रता आंदोलन का असर देहरादून के गांवों तक पहुंचा था। नून नदी से नमक बनाना और उसे शहर में नीलाम करना उस समय ब्रिटिश नमक कानून के खिलाफ दर्ज स्थानीय प्रतिरोध था।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. खाराखेत में नमक सत्याग्रह कब हुआ था?
20 अप्रैल 1930 को खाराखेत में नून नदी के किनारे नमक बनाया गया था।
Q. खाराखेत में नमक किस पानी से बनाया गया था?
स्वतंत्रता सेनानियों ने नून नदी के हल्के नमकीन पानी से नमक तैयार किया था।
Q. इस आंदोलन का विरोध किस कानून के खिलाफ था?
यह ब्रिटिश सरकार के नमक कानून के खिलाफ था, जिसके तहत नमक बनाने और बेचने पर नियंत्रण था।
Q. तैयार नमक की नीलामी कहां की जाती थी?
नमक को देहरादून शहर लाकर कचहरी के पास, वर्तमान तहसील चौक/टाउन हॉल क्षेत्र में नीलाम किया जाता था।
Q. खाराखेत सत्याग्रह में कौन-कौन शामिल हुए थे?
खड़क बहादुर थापा, महावीर त्यागी, उल्लास वर्मा, नरदेव शास्त्री और कृष्ण दत्त वैद्य समेत कई सेनानी इसमें शामिल हुए थे।
Q. क्या खाराखेत में इस आंदोलन का स्मारक है?
हां, नून नदी के किनारे स्वतंत्रता सेनानियों की याद में स्मारक बनाया गया है। उस पर महात्मा गांधी और आंदोलन से जुड़े कई लोगों के नाम दर्ज हैं।
Q. खाराखेत में 2015 में क्या कार्यक्रम हुआ था?
2015 में उत्तराखंड राज्य अभिलेखागार ने नमक सत्याग्रह की 85वीं वर्षगांठ पर कार्यक्रम और दस्तावेजों की प्रदर्शनी आयोजित की थी।
Q. 2026 में खाराखेत में कौन-सा आयोजन हुआ?
मार्च 2026 में खाराखेत सेनानी स्मारक पर पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें स्वतंत्रता सेनानी परिवारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।








