केदारनाथ धाम जाने वाले पैदल मार्ग पर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रुद्रप्रयाग पुलिस ने जांच अभियान तेज किया है। इस दौरान ऐसे 35 घोड़ा-खच्चर संचालकों पर कार्रवाई हुई, जिनके पास यात्रियों को ले जाने का वैध लाइसेंस नहीं था।
पुलिस के मुताबिक, जिला पंचायत यात्रियों और माल-सामान की ढुलाई के लिए अलग-अलग लाइसेंस जारी करती है। सिर्फ माल ढुलाई की अनुमति वाले संचालक यात्रियों को घोड़ा-खच्चर पर नहीं ले जा सकते। ऐसा करना तय नियमों और लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन है।
3 जगहों पर हुई कार्रवाई
जांच के दौरान अलग-अलग पड़ावों पर यात्रियों को ले जाते संचालक पकड़े गए। स्थानवार कार्रवाई इस तरह रही:
- गौरीकुंड में 5 संचालकों पर कार्रवाई हुई।
- भीमबली में 8 संचालकों के चालान किए गए।
- लिंचोली में 22 संचालकों के खिलाफ चालानी कार्रवाई हुई।
इन सभी मामलों को मिलाकर 35 संचालकों पर उत्तराखंड पुलिस अधिनियम के तहत चालान किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्रवाई का आधार यात्रियों की ढुलाई के लिए जरूरी लाइसेंस का नहीं होना था।
यात्रियों को अधिकृत साधन से भेजा गया
पुलिस ने बताया कि जिन यात्रियों को ऐसे घोड़ा-खच्चरों से ले जाया जा रहा था, उन्हें अधिकृत यात्री ढुलाई वाले घोड़ा-खच्चरों में बैठाकर आगे रवाना किया गया। इसका उद्देश्य यात्रा मार्ग पर तय नियमों का पालन कराना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा बनाए रखना है।
केदारनाथ पैदल मार्ग पर पुलिस घोड़ा-खच्चर संचालन से जुड़े लाइसेंस और नियमों की जांच लगातार कर रही है। रुद्रप्रयाग पुलिस ने कहा है कि यात्रा के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई जारी रहेगी।
निष्कर्ष
रुद्रप्रयाग पुलिस की जांच में यात्री ढुलाई का वैध लाइसेंस नहीं रखने वाले 35 संचालकों पर चालान हुआ। यात्रियों को अधिकृत घोड़ा-खच्चरों से आगे भेजा गया और मार्ग पर जांच जारी रखने की बात कही गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. केदारनाथ मार्ग पर कितने संचालकों के चालान हुए?
35 घोड़ा-खच्चर संचालकों के खिलाफ उत्तराखंड पुलिस अधिनियम के तहत चालानी कार्रवाई की गई।
Q. कार्रवाई किन जगहों पर हुई?
कार्रवाई गौरीकुंड, भीमबली और लिंचोली में हुई।
Q. सबसे ज्यादा मामले किस जगह मिले?
लिंचोली में 22 संचालकों के खिलाफ कार्रवाई हुई, जो तीनों स्थानों में सबसे ज्यादा है।
Q. संचालकों पर कार्रवाई क्यों की गई?
वे यात्री ढुलाई का वैध लाइसेंस नहीं होने के बावजूद यात्रियों को घोड़ा-खच्चरों से ले जाते मिले।
Q. यात्रियों के साथ क्या किया गया?
यात्रियों को अधिकृत यात्री ढुलाई वाले घोड़ा-खच्चरों में बैठाकर सुरक्षित रूप से आगे भेजा गया।













