पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने उत्तराखंड स्थित परमार्थ निकेतन का दौरा किया और स्वामी चिदानंद जी से आशीर्वाद लिया। उन्होंने अपनी पत्नी के साथ यहां बिताए समय को प्रेरणादायक बताया।
धनखड़ ने कहा कि आश्रम में प्रवेश करते ही उन्हें आध्यात्मिकता, धार्मिक भाव और समाज के लिए योगदान देने का संदेश महसूस हुआ। उन्होंने बताया कि परमार्थ निकेतन की स्थापना 1940 में हुई थी।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को समाज, मानव संसाधन और सभी जीवों के लिए योगदान देने की स्थिति में हमेशा तैयार रहना चाहिए। धनखड़ के अनुसार, यहां बिताया हर पल उन्हें हर परिस्थिति में समाज की सेवा करने की सीख देता है।
पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा कि काम कितना भी मुश्किल हो, परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण हों या रास्ता कितना भी कठिन हो, मानवता की सेवा के लक्ष्य से नहीं भटकना चाहिए।













