हरिद्वार में रखरखाव के लिए अपर गंगा नहर बंद होने के बाद नदी तल सामने आ गया। सफाई के दौरान यहां प्लास्टिक, पॉलीथिन, पुराने कपड़े, नारियल के छिलके, मूर्तियां और बड़ी मात्रा में अन्य कचरा मिला। यह स्थिति गंगा में धार्मिक आस्था के साथ छोड़े जा रहे कचरे पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

यह नहर हर साल रखरखाव के लिए बंद की जाती है। पानी हटने के बाद सफाई का काम शुरू होता है और नदी तल पर जमा सामग्री साफ दिखाई देने लगती है। कचरे में रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों के साथ पूजा से जुड़ी सामग्री भी शामिल है।

हर की पैड़ी पर घटा पानी

रखरखाव बंदी के दौरान हरिद्वार के हर की पैड़ी क्षेत्र में पानी का स्तर घट गया। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, श्रद्धालुओं को गंगा में सामान्य स्नान के बजाय मग और लोटे से पानी लेने की स्थिति का सामना करना पड़ा।

द न्यूज मिल और एएनआई ने नहर की 20 दिन की बंदी और इससे श्रद्धालुओं पर पड़े असर की जानकारी दी। द डेली जागरण की रिपोर्ट में नहर बंद रहने से पानी की आपूर्ति पर असर पड़ने की बात कही गई।

आस्था और कचरे के बीच विरोधाभास

गंगा को लोग मां का दर्जा देते हैं, लेकिन नदी तल पर मिला कचरा इस आस्था के व्यवहारिक पक्ष पर सवाल उठाता है। प्लास्टिक और पॉलीथिन लंबे समय तक बने रहते हैं। पुराने कपड़े, नारियल के छिलके और मूर्तियां भी नदी की सफाई व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं।

नहर बंद होने के बाद सफाईकर्मियों को पानी के भीतर दिखाई नहीं देने वाला कचरा हटाने का मौका मिलता है। नदी तल पर जमा हर वस्तु यह बताती है कि पूजा सामग्री और इस्तेमाल की चीजों के निपटारे की व्यवस्था कितनी जरूरी है।

लोगों के लिए क्या संदेश है

इस घटनाक्रम का सीधा संदेश यह है कि श्रद्धा के नाम पर नदी में कुछ भी छोड़ना गंगा को साफ रखने में मदद नहीं करता। पूजा सामग्री, कपड़े, प्लास्टिक और पॉलीथिन को नदी में बहाने के बजाय तय जगह पर जमा करना जरूरी है।

नहर की सफाई के बाद पानी लौटने पर यही कचरा फिर दिखाई नहीं देगा, लेकिन उससे पैदा होने वाली समस्या खत्म नहीं होगी। गंगा की सफाई केवल बंदी के दौरान किए जाने वाले अभियान से नहीं, बल्कि कचरा नदी में न डालने की जिम्मेदारी से भी जुड़ी है।

निष्कर्ष

अपर गंगा नहर की रखरखाव बंदी ने हरिद्वार में नदी तल पर जमा कचरे को सामने ला दिया। प्लास्टिक, पॉलीथिन और पूजा सामग्री की मौजूदगी बताती है कि गंगा को साफ रखने के लिए सफाई के साथ लोगों के व्यवहार में बदलाव भी जरूरी है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. अपर गंगा नहर क्यों बंद की जाती है?

रखरखाव और सफाई के लिए अपर गंगा नहर हर साल बंद की जाती है।

Q. नदी तल पर किस तरह का कचरा मिला?

वहां प्लास्टिक, पॉलीथिन, पुराने कपड़े, नारियल के छिलके, मूर्तियां और अन्य कचरा मिला।

Q. पानी घटने का असर कहां दिखा?

हरिद्वार के हर की पैड़ी क्षेत्र में पानी का स्तर घटा और श्रद्धालुओं को मग व लोटे से स्नान करना पड़ा।

Q. नहर बंद रहने की अवधि कितनी बताई गई है?

द न्यूज मिल और एएनआई की रिपोर्ट में नहर की बंदी 20 दिन की बताई गई है।

Q. गंगा में कचरा डालने से क्या समस्या सामने आती है?

इससे नदी तल पर प्लास्टिक, पूजा सामग्री और अन्य कचरा जमा होता है, जिसे बाद में सफाई के दौरान हटाना पड़ता है।