गढ़वाल मोटर ऑनर्स यूनियन लिमिटेड (जीएमओयू) में करीब 1.81 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। कंपनी प्रबंधन की जांच के बाद जीएमओयू के संयुक्त सचिव नितिन रावत ने पुलिस उपाधीक्षक को शिकायत दी है। इसमें आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायत के अनुसार, जीएमओयू मुख्यालय कोटद्वार में फर्जी प्रार्थना पत्र और वाउचर तैयार कर कंपनी के खजाने से रकम निकाली गई। यह मामला मार्च 2025 में सामने आए कथित घोटाले की तर्ज पर किए गए भुगतान से जुड़ा बताया गया है।
जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया
नितिन रावत ने वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के लेन-देन की जांच कराने की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में करीब 1.81 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता पकड़ी गई।
कंपनी की जांच समिति की 17 सितंबर 2026 की रिपोर्ट और विशेष मुख्य लेखा अधिकारी की 6 अक्तूबर 2026 की रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। इन रिपोर्टों के आधार पर पुलिस से मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई का अनुरोध किया गया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ पदाधिकारियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलीभगत कर भुगतान दिखाए। इसके लिए फर्जी नामों, वाहन स्वामियों के नाम पर तैयार कागजात और काल्पनिक खर्चों का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है।
किन लोगों की भूमिका पर सवाल
शिकायत में पूर्व चेयरमैन, तत्कालीन महाप्रबंधक, तत्कालीन सहायक लेखाधिकारी, तत्कालीन लेखा लिपिक, तत्कालीन कैशियर और तत्कालीन स्टेशन इंचार्ज की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। इन लोगों के खिलाफ आरोपों की जांच और प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में 3.85 करोड़ रुपये का गबन किया गया। हालांकि, उपलब्ध विवरण में इस रकम से जुड़े अलग-अलग लेन-देन का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।
जीएमओयू से जुड़े दूसरे मामले का भी जिक्र
इस शिकायत से एक दिन पहले जीएमओयू की जमीन खुर्दबुर्द किए जाने के आरोप में कोतवाली पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। यह कार्रवाई सीओ की जांच के बाद हुई थी। जमीन से जुड़ा मामला मौजूदा वित्तीय अनियमितता की शिकायत से अलग है।
वर्तमान मामले में पुलिस को शिकायत मिलने के बाद प्राथमिकी दर्ज करने और जांच आगे बढ़ाने की मांग की गई है। उपलब्ध जानकारी में प्राथमिकी दर्ज होने या किसी आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं है।
निष्कर्ष
जीएमओयू में करीब 1.81 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर कंपनी प्रबंधन ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। जांच रिपोर्टों में दर्ज आरोपों की पुलिस जांच और उसके बाद की कानूनी प्रक्रिया से ही जिम्मेदारी तय होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. जीएमओयू में कितनी रकम की कथित अनियमितता सामने आई है?
शिकायत के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 में करीब 1.81 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई है।
Q. रकम निकालने के लिए किस तरह के दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप है?
फर्जी प्रार्थना पत्र और वाउचर तैयार कर भुगतान दिखाने का आरोप लगाया गया है।
Q. शिकायत किसने दी है?
जीएमओयू के संयुक्त सचिव नितिन रावत ने पुलिस उपाधीक्षक को शिकायत दी है।
Q. शिकायत में किन वित्तीय वर्षों की जांच की मांग की गई है?
वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 की जांच की मांग की गई है।
Q. जांच रिपोर्ट कब जारी हुईं?
कंपनी की जांच समिति की रिपोर्ट 17 सितंबर 2026 और विशेष मुख्य लेखा अधिकारी की रिपोर्ट 6 अक्तूबर 2026 की है।
Q. क्या किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई है?
उपलब्ध जानकारी में किसी आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं है।
Q. क्या प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है?
इस वित्तीय अनियमितता के मामले में पुलिस उपाधीक्षक को शिकायत देकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है।









