देहरादून में बाहरी राज्यों से आकर रहने वाले लोगों के सत्यापन अभियान के बीच राजस्थान के सीकर से जुड़े एक आरोपी की गिरफ्तारी ने पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस के अनुसार, कल्याण सिंह करीब 18 साल तक गिरफ्तारी से बचता रहा और देहरादून में परिवार के साथ रहकर अपनी स्थानीय पहचान बनाने में कामयाब रहा।
कल्याण सिंह मूल रूप से राजस्थान के जालोर जिले के भोरटा गांव का रहने वाला है। सीकर में उस पर युवाओं को बीएड कराने का भरोसा देकर लाखों रुपये लेने का आरोप है। सीकर पुलिस के मुताबिक, उसके खिलाफ 2008 से 2013 के बीच कुल 23 मुकदमे दर्ज हुए थे।
बीएड कराने के नाम पर रकम लेने का आरोप
पुलिस के अनुसार, कल्याण सिंह ने सीकर में कोचिंग शुरू की थी। बाद में उसकी मुलाकात विकास सक्सेना से हुई। दोनों ने विद्यार्थियों को मेरठ विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के जरिये बीएड कराने का भरोसा दिया। इसके बदले प्रत्येक विद्यार्थी से करीब 70 से 80 हजार रुपये लेने का आरोप है।
उस समय शिक्षक भर्ती से जुड़ी कई परीक्षाएं हो रही थीं और उनमें शामिल होने के लिए बीएड की डिग्री जरूरी मानी जाती थी। इसी जरूरत का फायदा उठाकर विद्यार्थियों से रकम ली गई। विश्वविद्यालय से जुड़े करीब 50 कॉलेजों की मान्यता रद्द होने की जानकारी सामने आने के बाद भी रकम लेने का सिलसिला जारी रहने का आरोप है।
वर्ष 2008 में विद्यार्थियों ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराने शुरू किए। विकास सक्सेना गिरफ्तार हो गया, लेकिन कल्याण सिंह फरार हो गया। इसके बाद उसने अपने गांव और रिश्तेदारों से संपर्क बंद कर दिया, ताकि पुलिस उस तक न पहुंच सके।
देहरादून में परिवार के लिए बनाया ठिकाना
सीकर से निकलने के बाद कल्याण सिंह देहरादून पहुंचा और किराये के मकान में रहने लगा। उसने प्रेमनगर थाना क्षेत्र में परिवार के लिए मकान बनवाया। पुलिस के अनुसार, उसने देहरादून के पते पर पहले राशन कार्ड और बाद में अन्य दस्तावेज बनवाए।
स्थानीय पते पर उसके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं था। ऐसे में केवल देहरादून के पते के आधार पर सत्यापन होने पर सीकर में दर्ज पुराने मामलों की जानकारी सामने आना मुश्किल था। यही वजह है कि यह गिरफ्तारी बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों के सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती है।
कल्याण सिंह ने देहरादून और दूसरे शहरों के कोचिंग संस्थानों में शिक्षक के रूप में काम किया। वह नोएडा, अलीगढ़, महाराष्ट्र, चेन्नई, वाराणसी, मध्य प्रदेश और सिलीगुड़ी में भी रहा। इस दौरान उसका परिवार देहरादून में ही रहता था। कोरोना काल में नौकरी जाने के बाद वह देहरादून लौटकर ऑनलाइन कक्षाएं लेने लगा।
तकनीकी जानकारी से मिला सुराग
सीकर पुलिस कई बार कल्याण सिंह के गांव और रिश्तेदारों के यहां दबिश दे चुकी थी, लेकिन वह हाथ नहीं आया। इस बार जयपुर रेंज आईजी राहुल प्रकाश की टीम और सीकर कोतवाली पुलिस ने तकनीकी जानकारी तथा मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर उसकी तलाश की।
पुलिस को उसके प्रेमनगर थाना क्षेत्र में रहने की जानकारी मिली। इसके बाद टीम एयरटेल फाइबर टेक्नीशियन बनकर उसके घर पहुंची। पुलिस के अनुसार, आरोपी को भनक लगने से पहले ही टीम ने उसे पकड़ लिया। उसकी गिरफ्तारी 10 अक्टूबर को हुई और 11 अक्टूबर को उसे सीकर ले जाया गया।
सत्यापन अभियान के सामने चुनौती
यह मामला दिखाता है कि किसी व्यक्ति का स्थानीय पता और दस्तावेज उसके दूसरे राज्य में दर्ज पुराने आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी नहीं देते। देहरादून में दस्तावेज बनने और परिवार का स्थायी ठिकाना तैयार होने के बावजूद सीकर के मामलों से जुड़ी जानकारी लंबे समय तक सामने नहीं आई।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने वर्षों तक अलग-अलग शहरों में शिक्षक के रूप में काम किया और अपनी पहचान सामान्य निवासी की तरह बनाए रखी। ऐसे मामलों में अलग-अलग राज्यों के रिकॉर्ड और स्थानीय सत्यापन के बीच समन्वय अहम चुनौती बनता है।
निष्कर्ष
सीकर में दर्ज 23 मुकदमों से जुड़े कल्याण सिंह को करीब 18 साल बाद देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। स्थानीय दस्तावेज और स्थायी ठिकाना होने के बावजूद पुराने मामलों का पता देर से चलना सत्यापन अभियान की बड़ी चुनौती सामने लाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. कल्याण सिंह कहां से गिरफ्तार हुआ?
वह देहरादून के प्रेमनगर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार हुआ।
Q. कल्याण सिंह पर कितने मुकदमे दर्ज हैं?
सीकर में उसके खिलाफ 2008 से 2013 के बीच कुल 23 मुकदमे दर्ज हुए थे।
Q. उस पर किस तरह की ठगी का आरोप है?
उस पर विद्यार्थियों को बीएड कराने का भरोसा देकर रकम लेने का आरोप है।
Q. विद्यार्थियों से कितनी रकम ली गई?
पुलिस के अनुसार, प्रत्येक विद्यार्थी से करीब 70 से 80 हजार रुपये लिए गए।
Q. वह कितने समय तक गिरफ्तारी से बचा रहा?
वह करीब 18 साल तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहा।
Q. देहरादून में उसने कौन से दस्तावेज बनवाए?
पुलिस के अनुसार, उसने देहरादून के पते पर राशन कार्ड और अन्य दस्तावेज बनवाए।
Q. पुलिस ने उसे कैसे पकड़ा?
सीकर पुलिस की टीम एयरटेल फाइबर टेक्नीशियन बनकर उसके घर पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया।
Q. गिरफ्तारी के बाद उसे कहां ले जाया गया?
10 अक्टूबर को गिरफ्तारी के बाद 11 अक्टूबर को उसे सीकर ले जाया गया।











