देहरादून में जीएमएस रोड पर कमला पैलेस के पास चल रहे एक संदिग्ध कॉल सेंटर के मामले में पुलिस ने कंपनी के 2 अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई एसटीएफ की साइबर क्राइम टीम और देहरादून पुलिस ने मिलकर की। पुलिस के अनुसार, यहां ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड के नाम पर कॉल कर दबाव बनाने और ठगी करने का आरोप है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कंपनी मैनेजर लक्ष्मण प्रसाद और रीजनल मैनेजर जगमोहन सिंह रावत के रूप में हुई है। दोनों के खिलाफ साइबर क्राइम थाने में बीएनएस, आईटी एक्ट और दूरसंचार अधिनियम की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले की जांच अभी जारी है।
दूरसंचार विभाग के इनपुट पर हुई कार्रवाई
एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह के मुताबिक, दूरसंचार विभाग से मिली जानकारी के बाद टीम ने कैरियर हाउस बिल्डिंग में स्थित सिंह एसेट रिकॉन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (SARS) के कार्यालय की तलाशी ली। जांच के दौरान टीम को 32 स्लॉट वाला सिम बॉक्स मिला। इसमें 45 सिम कार्ड इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई।
पुलिस के अनुसार, कार्यालय में 30 से अधिक युवक-युवतियां काम कर रहे थे। इन्हें कमीशन के आधार पर भुगतान किया जाता था। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि कॉल सेंटर से कितने ग्राहकों से संपर्क किया गया और कथित ठगी में किसकी क्या भूमिका रही।
कई बैंकों के ग्राहकों का डेटा मिलने का दावा
तलाशी के दौरान एक सिम बॉक्स, 45 सिम कार्ड, लैपटॉप, 2 राउटर, 4 जीबी रैम और 2 एटीएम कार्ड बरामद किए गए। पुलिस ने लैपटॉप की जांच में कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों के ग्राहकों के क्रेडिट कार्ड से जुड़ा डेटा मिलने की बात कही है।
इस डेटा में एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, एक्सिस बैंक, पूनावाला फाइनेंस, यस बैंक और आरबीएल समेत संस्थानों के ग्राहकों की जानकारी शामिल होने का दावा किया गया है। पुलिस ने अभी यह नहीं बताया है कि इस डेटा का स्रोत क्या था या इससे कितनी रकम की ठगी हुई।
व्यक्तिगत मोबाइल नंबरों से कॉलिंग का आरोप
पुलिस के मुताबिक, कॉल सेंटर में ग्राहकों को क्रेडिट कार्ड और उनसे जुड़े लाभ बताने के बहाने फोन किए जाते थे। कुछ मामलों में जल्द रकम जमा कराने के लिए धमकाने और दबाव बनाने का भी आरोप है।
जांच में यह भी सामने आया कि कॉलिंग के लिए निर्धारित 1600 नंबर सीरीज का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। इसके बजाय व्यक्तिगत मोबाइल नंबरों से ग्राहकों से संपर्क किया जा रहा था। पुलिस अब बरामद उपकरणों और डेटा की आगे जांच कर रही है।
निष्कर्ष
देहरादून पुलिस और एसटीएफ की कार्रवाई में संदिग्ध कॉल सेंटर, सिम बॉक्स और ग्राहकों से जुड़ा डेटा सामने आया है। 2 गिरफ्तारियों के बाद प्राथमिकी दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. देहरादून में कार्रवाई कहां हुई?
जीएमएस रोड पर कमला पैलेस के पास स्थित कैरियर हाउस बिल्डिंग में कार्रवाई की गई। वहां सिंह एसेट रिकॉन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (SARS) का कार्यालय था।
Q. जांच टीम को क्या मिला?
कार्यालय से 32 स्लॉट वाला सिम बॉक्स और 45 सिम कार्ड मिले। इसके अलावा लैपटॉप, 2 राउटर, 2 एटीएम कार्ड और 4 जीबी रैम भी बरामद किए गए।
Q. पुलिस ने किन लोगों को गिरफ्तार किया है?
कंपनी मैनेजर लक्ष्मण प्रसाद और रीजनल मैनेजर जगमोहन सिंह रावत को गिरफ्तार किया गया है।
Q. कॉल सेंटर पर क्या आरोप है?
पुलिस के अनुसार, क्रेडिट कार्ड और उसके लाभ बताने के नाम पर ग्राहकों को फोन किए जाते थे। कुछ मामलों में रकम जमा कराने के लिए धमकी और दबाव बनाने का आरोप है।
Q. मामले में कौन-सी धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई है?
साइबर क्राइम थाने में बीएनएस, आईटी एक्ट और दूरसंचार अधिनियम की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
Q. कॉलिंग के लिए किस तरह के नंबर इस्तेमाल किए जा रहे थे?
जांच के अनुसार, निर्धारित 1600 नंबर सीरीज के बजाय व्यक्तिगत मोबाइल नंबरों से कॉल की जा रही थी।








