देहरादून के राजपुर क्षेत्र में किराये के फ्लैट से अमेरिका और कनाडा के लोगों से साइबर ठगी करने के आरोप में पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी एंटीवायरस इंस्टॉल कराने का झांसा देकर विदेशियों से 100 डॉलर के गिफ्ट कार्ड खरीदवाते थे।
एसओ राजपुर पीडी भट्ट ने बताया कि सोमवार रात तरला नागल रोड स्थित आर्चिड पार्क के एक फ्लैट में छापा मारा गया। पुलिस ने मौके से आशीष नागर, अक्षत शर्मा, अंशु मुद्गल, राज सिंह और अभिनव सिंह को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, सभी आरोपी उत्तर प्रदेश के मेरठ और सुल्तानपुर के रहने वाले हैं।
5000 लोगों के नंबर खरीदने का दावा
पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी आशीष ने बताया कि वह पहले नोएडा के एक कॉल सेंटर में काम करता था। वहां उसने इसी तरह की ठगी करना सीखा। करीब 3 महीने पहले वह देहरादून आया और यहां से यह काम शुरू किया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने अमेरिका और कनाडा के करीब 5000 लोगों के नंबर खरीदे थे। वे खरीदारों को अंग्रेजी में अपना नाम बताते और वॉइस ऐप के जरिए कॉल करते थे। बातचीत के दौरान मोबाइल फोन और लैपटॉप में एंटीवायरस इंस्टॉल करने की बात कहकर गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए दबाव बनाया जाता था।
आरोप है कि गिफ्ट कार्ड मिलने के बाद उन्हें कम कीमत पर बेच दिया जाता था। इसके बाद रकम आरोपियों के बैंक खातों में मंगाई जाती थी। पुलिस ने आरोपियों के पास से 14 मोबाइल फोन, 4 लैपटॉप, एक आईपैड और 3 कारें बरामद की हैं। सभी के खिलाफ राजपुर थाने में आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है।
नौकरी का झांसा देकर बैंक खाते का इस्तेमाल
देहरादून के मोती बाजार निवासी अविरल सेठ ने शहर कोतवाली में साइबर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि 2024 में काम की तलाश के दौरान उनकी मुलाकात अनिमेष लहरी से हुई थी। अनिमेष ने उनकी पहचान मनतोष और समर से कराई।
शिकायत के अनुसार, तीनों ने अविरल को इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट कारोबार में काम दिलाने का झांसा दिया। इसके बाद उनके मोबाइल फोन में गो पे ऐप डाउनलोड कराया गया। अविरल का आरोप है कि इससे फोन पर आने वाले सभी मैसेज आरोपियों तक पहुंचने लगे।
शिकायत में कहा गया है कि आरोपियों ने उनके नाम से आईडीएफसी बैंक में खाता खुलवाया और उसका लॉगिन आईडी-पासवर्ड ले लिया। बाद में बैंक से पता चला कि इसी खाते में साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी रकम का लाखों रुपये का लेनदेन हुआ है। इसके बाद बैंक ने खाता फ्रीज कर दिया। शहर कोतवाल केसी भट्ट ने बताया कि तीनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है।
बिना ओटीपी खाते से 1.70 लाख रुपये ट्रांसफर
प्रेमनगर क्षेत्र में 79 वर्षीय अवतार सिंह बिष्ट के बैंक खाते से 1.70 लाख रुपये ट्रांसफर होने का मामला सामने आया है। उन्होंने पुलिस को बताया कि उन्होंने किसी को ओटीपी नहीं बताई थी और वह नेट बैंकिंग का इस्तेमाल भी नहीं करते हैं।
अवतार सिंह बिष्ट का खाता सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की पंडितवाड़ी शाखा में है। उनके अनुसार, बीती 8 अक्तूबर की दोपहर खाते से रकम किसी दूसरे खाते में भेजी गई। उन्हें इसका पता रात में मोबाइल पर आया एसएमएस देखने के बाद चला। एसओ प्रेमनगर गिरीश नेगी ने बताया कि केस दर्ज कर जांच की जा रही है।
निष्कर्ष
देहरादून में साइबर धोखाधड़ी से जुड़े 3 अलग-अलग मामलों में पुलिस ने कार्रवाई शुरू की है। राजपुर मामले में 5 लोगों की गिरफ्तारी हुई है, जबकि बैंक खाते के इस्तेमाल और 1.70 लाख रुपये की निकासी से जुड़े मामलों की जांच जारी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. राजपुर मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया?
पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके नाम आशीष नागर, अक्षत शर्मा, अंशु मुद्गल, राज सिंह और अभिनव सिंह हैं।
Q. राजपुर में आरोपी किस तरह ठगी करते थे?
वे मोबाइल फोन और लैपटॉप में एंटीवायरस इंस्टॉल कराने का झांसा देकर अमेरिका और कनाडा के लोगों से 100 डॉलर के गिफ्ट कार्ड खरीदवाते थे।
Q. पुलिस ने आरोपियों के पास से क्या बरामद किया?
पुलिस ने 14 मोबाइल फोन, 4 लैपटॉप, एक आईपैड और 3 कारें बरामद की हैं।
Q. राजपुर मामले में कितने लोगों के नंबर खरीदे गए थे?
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने अमेरिका और कनाडा के करीब 5000 लोगों के नंबर खरीदे थे।
Q. अविरल सेठ की शिकायत में क्या आरोप है?
उनका आरोप है कि नौकरी और इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट कारोबार का झांसा देकर उनके बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी की रकम के लेनदेन में किया गया।
Q. अविरल सेठ के खाते के साथ क्या हुआ?
बैंक से साइबर धोखाधड़ी से जुड़े लाखों रुपये के लेनदेन की जानकारी मिलने के बाद खाता फ्रीज कर दिया गया।
Q. प्रेमनगर मामले में कितनी रकम ट्रांसफर हुई?
अवतार सिंह बिष्ट के खाते से 1.70 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर हुए।
Q. क्या प्रेमनगर मामले में ओटीपी साझा की गई थी?
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि उन्होंने किसी को ओटीपी नहीं बताई थी और नेट बैंकिंग का इस्तेमाल भी नहीं करते थे।











