उत्तराखंड के देहरादून में विशेष पॉक्सो अदालत ने 3 साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में उसके रिश्ते के दादा को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर ₹40 हजार का जुर्माना भी लगाया।

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफटीएससी (पॉक्सो) मंजू सिंह मुंडे की अदालत ने शनिवार को यह फैसला सुनाया। मामला नेहरू कॉलोनी थाना क्षेत्र का है और घटना मार्च 2025 की बताई गई है।

मां की शिकायत पर दर्ज हुआ था मुकदमा

पीड़िता की मां की शिकायत पर 25 मार्च 2025 को नेहरू कॉलोनी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोपी बच्ची की मां का ससुर था और परिवार के पड़ोस में ही रहता था।

अभियोजन के अनुसार, घटना वाले दिन बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। आरोप था कि आरोपी उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान बच्ची की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई।

अदालत ने बचाव पक्ष की दलील खारिज की

बचाव पक्ष ने दोनों परिवारों के बीच नाली के पानी को लेकर विवाद होने की दलील दी थी। अदालत ने इस विवाद और दुष्कर्म की घटना के बीच कोई संबंध नहीं पाया।

अभियोजन पक्ष ने मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित किए। अपराध की गंभीरता और समाज पर उसके प्रतिकूल असर को देखते हुए अदालत ने दोषी को परिवीक्षा का लाभ देने से इनकार कर दिया।

निष्कर्ष

देहरादून की विशेष पॉक्सो अदालत ने 3 साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में रिश्ते के दादा को 20 साल के कठोर कारावास और ₹40 हजार जुर्माने की सजा दी। अदालत ने अभियोजन के मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों को स्वीकार किया तथा परिवीक्षा का लाभ नहीं दिया।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. यह मामला किस शहर का है?

यह मामला उत्तराखंड के देहरादून स्थित नेहरू कॉलोनी थाना क्षेत्र का है।

Q. अदालत ने दोषी को क्या सजा सुनाई?

विशेष पॉक्सो अदालत ने दोषी को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। उस पर ₹40 हजार का जुर्माना भी लगाया गया।

Q. घटना कब हुई थी?

घटना मार्च 2025 की बताई गई है।

Q. मुकदमा कब दर्ज हुआ था?

पीड़िता की मां की शिकायत पर 25 मार्च 2025 को नेहरू कॉलोनी थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था।

Q. आरोपी का बच्ची से क्या रिश्ता था?

आरोपी बच्ची की मां का ससुर था और परिवार के पड़ोस में रहता था।

Q. अदालत ने परिवीक्षा का लाभ क्यों नहीं दिया?

अदालत ने अपराध की गंभीरता और समाज पर उसके प्रतिकूल असर को देखते हुए परिवीक्षा का लाभ देने से इनकार किया।

Q. बचाव पक्ष ने क्या दलील दी थी?

बचाव पक्ष ने दोनों परिवारों के बीच नाली के पानी को लेकर विवाद होने की दलील दी थी। अदालत ने इसे घटना से संबंधित नहीं माना।