उत्तराखंड की अंतिम मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस ने चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि जनवरी 2025 के बाद अलग-अलग चरणों में करीब 14.99 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटे हैं। कांग्रेस अब ऐसे 97,186 मामलों की पोलिंग बूथ के हिसाब से जांच करेगी, जिनमें जवाब न मिलने के बाद नाम हटाए गए।

कांग्रेस की एसआईआर कमेटी के अध्यक्ष मनोज रावत के मुताबिक, फिलहाल जारी अंतिम सूची में राज्य के 71,58,929 मतदाता दर्ज हैं। सर्विस वोटरों की संख्या इसमें अभी शामिल नहीं हुई है। ड्राफ्ट सूची की तुलना में अंतिम सूची में 25,164 मतदाता बढ़े हैं।

फॉर्म-7 और नाम हटाने की प्रक्रिया पर सवाल

मनोज रावत ने बताया कि दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ड्राफ्ट सूची से 1,04,708 नाम हटाए गए। कांग्रेस का कहना है कि एसआईआर के दौरान विसंगतियों से जुड़े मामलों में मतदाताओं को नोटिस भेजे गए थे।

रावत के अनुसार, नाम हटाने के लिए कुल 96,704 फॉर्म-7 दाखिल हुए। इनमें 7,523 नाम हटाए गए, जो करीब 7.78% है। कांग्रेस का दावा है कि नोटिस भेजे जाने के बाद फॉर्म-7 दाखिल करने वाला कोई भी आपत्तिकर्ता सामने नहीं आया। पार्टी इसी स्थिति को जांच का अहम आधार मान रही है।

एसआईआर के दौरान करीब 25 लाख मतदाताओं को एनॉमली, लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी और नॉट-मैपिंग से जुड़े नोटिस जारी किए गए थे। कांग्रेस के मुताबिक, 97,186 लोगों ने इन नोटिस का जवाब नहीं दिया। रावत का दावा है कि जवाब नहीं मिलने के बाद इन मामलों में फॉर्म-7 खुद जनरेट हुआ और फिर संबंधित नाम हटाए गए।

जनवरी 2025 के बाद नाम हटने का कांग्रेस का आंकड़ा

कांग्रेस ने मतदाता सूची में हुए अलग-अलग बदलावों को जोड़कर करीब 14.99 लाख नाम हटने का दावा किया है। पार्टी के अनुसार, जनवरी 2025 से पहले के प्री-एसआईआर चरण में 5 लाख से अधिक नाम हटे।

इसके बाद एसआईआर के दौरान एब्सेंट, शिफ्टेड, डेड और डुप्लीकेट जैसे कारणों से करीब 8.26 लाख नाम हटाए गए। ड्राफ्ट और अंतिम सूची के बीच करीब 1.04 लाख नाम कम हुए। कांग्रेस ने इन सभी आंकड़ों को जोड़कर 14.99 लाख का आंकड़ा बताया है।

किच्छा और हल्द्वानी समेत सीटों की होगी पड़ताल

मनोज रावत ने किच्छा, हल्द्वानी और मंगलौर समेत कुछ विधानसभा क्षेत्रों का उल्लेख किया। उनका दावा है कि कई सीटों पर फॉर्म-7 की संख्या पिछली जीत के अंतर के बराबर या उससे अधिक रही। कांग्रेस का कहना है कि ऐसे क्षेत्रों में बूथ स्तर पर जांच जरूरी है।

प्रस्तावित पड़ताल में यह देखा जाएगा कि हटाए गए नामों में कितने लोग वास्तव में अपात्र थे और कितने पात्र मतदाता प्रक्रिया संबंधी वजहों से सूची से बाहर हुए। कांग्रेस ने कहा है कि उसका लक्ष्य अंतिम समय तक पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखना है।

नाम जोड़ने की स्पेशल ड्राइव पर भी आपत्ति

चुनाव आयोग की ओर से नाम जोड़ने के लिए शुरू की गई स्पेशल ड्राइव पर भी कांग्रेस ने सवाल उठाया है। मनोज रावत का कहना है कि चुनाव की अधिसूचना जारी होने तक फॉर्म-6 के जरिए नाम जोड़ने की प्रक्रिया सामान्य तौर पर चलती रहती है।

कांग्रेस के मुताबिक, मतदाता सूची में हुए बड़े बदलावों की समीक्षा और स्थिति को व्यवस्थित करने में समय लगेगा। पार्टी अब 97,186 नामों की बूथवार जांच के जरिए पात्र मतदाताओं और प्रक्रिया से प्रभावित मामलों को अलग करने की कोशिश करेगी।

निष्कर्ष

कांग्रेस ने मतदाता सूची से नाम हटने के आंकड़ों और फॉर्म-7 की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए बूथवार जांच का फैसला किया है। अभी उपलब्ध दावे पार्टी के हैं; जांच के बाद ही संबंधित मतदाताओं की पात्रता और नाम हटने की स्थिति स्पष्ट होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. उत्तराखंड की अंतिम मतदाता सूची में कितने मतदाता दर्ज हैं?

अभी जारी सूची में 71,58,929 मतदाता दर्ज हैं। सर्विस वोटरों की संख्या अभी इसमें जुड़ना बाकी है।

Q. कांग्रेस ने जनवरी 2025 के बाद कितने नाम हटने का दावा किया है?

कांग्रेस का दावा है कि जनवरी 2025 के बाद करीब 14.99 लाख मतदाताओं के नाम अलग-अलग चरणों में हटे।

Q. बूथवार जांच किन मामलों की होगी?

कांग्रेस 97,186 ऐसे मामलों की बूथवार जांच करेगी, जिनमें नोटिस का जवाब नहीं मिलने के बाद नाम हटाए गए।

Q. कितने फॉर्म-7 दाखिल किए गए थे?

मनोज रावत के अनुसार, कुल 96,704 फॉर्म-7 दाखिल किए गए थे।

Q. फॉर्म-7 के आधार पर कितने नाम हटे?

कांग्रेस के मुताबिक, 7,523 मतदाताओं के नाम हटे, जो करीब 7.78% है।

Q. एसआईआर के दौरान कितने मतदाताओं को नोटिस मिले?

कांग्रेस के अनुसार, करीब 25 लाख मतदाताओं को एनॉमली, लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी और नॉट-मैपिंग से जुड़े नोटिस भेजे गए थे।

Q. ड्राफ्ट सूची के मुकाबले अंतिम सूची में कितना बदलाव हुआ?

अंतिम सूची में ड्राफ्ट के मुकाबले 25,164 मतदाता बढ़े, जबकि 1,04,708 नाम हटाए गए।