देहरादून जिले के चकराता ब्लॉक में शादी के बाद दुल्हन शर्मिला अपनी बरात लेकर ससुराल पहुंचीं। बुल्हाड़ गांव की शर्मिला का विवाह दुर्गम उदावा गांव के अनिल चौहान से तय हुआ था। मंगलवार को शादी के बाद बरात वाहनों से लोखंडी तक पहुंची, लेकिन वहां से आगे सड़क नहीं होने के कारण पूरा दल पैदल चलने को मजबूर हुआ।
शर्मिला ने शादी का लहंगा पहने हुए लोखंडी से उदावा गांव तक करीब 18 किलोमीटर का पहाड़ी रास्ता तय किया। पगडंडियों और पत्थरों वाले रास्ते पर उन्हें लगातार 4 घंटे चलना पड़ा। लंबी दूरी और कठिन चढ़ाई के बावजूद वह बरात के साथ अपने ससुराल पहुंचीं।
गृह प्रवेश का मुहूर्त बचाने के लिए दौड़ीं
पैदल सफर लंबा होने से शर्मिला को गृह प्रवेश का शुभ मुहूर्त निकल जाने की चिंता हुई। समय पर पहुंचने की कोशिश में वह भारी लहंगे के साथ पहाड़ी रास्ते पर दौड़ती भी नजर आईं। ग्रामीणों ने इस दौरान उनका वीडियो बनाया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
इस घटना ने उदावा गांव तक सड़क नहीं होने की समस्या को सामने ला दिया है। article में बताया गया है कि आजादी के 78 साल बाद भी लोखंडी से उदावा तक सड़क सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसी वजह से बरात को वाहनों से उतरकर करीब 18 किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ा।
जोझोड़े परंपरा के तहत दुल्हन ले जाती है बरात
जौनसार-बावर क्षेत्र में प्रचलित जोझोड़े, जिसे जाजड़ा भी कहा जाता है, परंपरा के तहत दूल्हे के बजाय दुल्हन बरात लेकर ससुराल जाती है। चकराता ब्लॉक में शर्मिला की बरात इसी परंपरा के अनुसार उदावा गांव के लिए रवाना हुई थी।
जौनसारी समुदाय खुद को पांडवों का वंशज मानता है। क्षेत्र में महाभारत काल से जुड़े कई रीति-रिवाजों के जीवित होने की बात कही जाती है। जोझोड़े परंपरा को भी इसी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से जुड़ा बताया गया है।
दुल्हन ने मुख्यमंत्री से सड़क बनाने की अपील की
पैदल सफर के दौरान शर्मिला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उदावा गांव तक सड़क बनवाने की अपील की। उन्होंने कहा, “लोखंडी से उदावा गांव तक बरात लेकर पैदल जाना पड़ रहा है। रास्ता पक्का नहीं होने से बहुत थकान हो गई है और मुहूर्त बचाने के लिए दौड़ना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री जी, हमारे गांव उदावा तक जल्द सड़क बनवा दीजिए ताकि भविष्य में किसी और बेटी या ग्रामीण को ऐसी तकलीफ न उठानी पड़े।”
शर्मिला की अपील का केंद्र गांव तक पक्की सड़क पहुंचाना है, ताकि ग्रामीणों और शादी-ब्याह में आने वाले लोगों को दुर्गम रास्ते पर लंबी दूरी पैदल न तय करनी पड़े। उपलब्ध जानकारी में सड़क निर्माण को लेकर प्रशासन की ओर से किसी अगले कदम का उल्लेख नहीं है।
निष्कर्ष
चकराता के उदावा गांव में जोझोड़े परंपरा के तहत दुल्हन बरात लेकर ससुराल पहुंचीं, लेकिन सड़क सुविधा न होने से उन्हें लहंगे में 18 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। शर्मिला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गांव तक सड़क बनाने की मांग की है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. यह मामला कहां का है?
यह मामला देहरादून जिले के चकराता ब्लॉक के उदावा गांव का है।
Q. दुल्हन का नाम क्या है?
दुल्हन का नाम शर्मिला है और वह चकराता के बुल्हाड़ गांव की निवासी हैं।
Q. शर्मिला ने कितनी दूरी पैदल तय की?
उन्होंने लोखंडी से उदावा गांव तक करीब 18 किलोमीटर का रास्ता पैदल तय किया।
Q. पैदल सफर पूरा करने में कितना समय लगा?
शर्मिला और बरात को यह पहाड़ी सफर पूरा करने में करीब 4 घंटे लगे।
Q. बरात को पैदल क्यों जाना पड़ा?
लोखंडी से उदावा गांव तक सड़क नहीं होने के कारण बरात को वाहनों से उतरकर पैदल जाना पड़ा।
Q. दुल्हन रास्ते में क्यों दौड़ीं?
शर्मिला को गृह प्रवेश का शुभ मुहूर्त निकल जाने की चिंता थी, इसलिए वह समय पर पहुंचने के लिए दौड़ीं।
Q. जौनसार में दुल्हन के बरात ले जाने की परंपरा क्या कहलाती है?
इस परंपरा को जोझोड़े या जाजड़ा कहा जाता है। इसमें दुल्हन बरात लेकर दूल्हे के घर जाती है।
Q. शर्मिला ने मुख्यमंत्री से क्या मांग की?
उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उदावा गांव तक जल्द सड़क बनवाने की अपील की।










