उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बनबसा में कहा कि राज्य में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ रही है। उनके मुताबिक, कई महिलाएं अपने उद्यम चला रही हैं और ऐसे गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बना रही हैं, जिनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
धामी ने कहा कि स्वरोजगार बढ़ने से गांवों और पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है। उन्होंने बताया कि जो महिलाएं पहले मुख्य रूप से घर संभालने तक सीमित थीं, वे अब व्यापक अर्थव्यवस्था में योगदान दे रही हैं।
सरकार की नीतियों और कानूनों का जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू किए जाने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बना।
धामी ने जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए बनाए गए सख्त कानून का भी जिक्र किया। इसके साथ ही उन्होंने दंगों को रोकने के लिए कानून बनाए जाने की बात कही। मुख्यमंत्री ने इन कदमों को राज्य सरकार की निर्णायक कार्रवाई के तौर पर पेश किया।
इन बयानों में धामी ने कानूनों के उद्देश्य और सरकार की नीति पर जोर दिया। उपलब्ध जानकारी में इन कानूनों के तहत दर्ज मामलों, कार्रवाई या उनके लागू होने के विस्तृत आंकड़े नहीं दिए गए हैं।
सरकारी जमीन वापस लेने का दावा
मुख्यमंत्री ने ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ कार्रवाई का भी दावा किया। उन्होंने इसे सरकारी जमीन पर बड़े स्तर पर अवैध कब्जे से जुड़ी कथित सुनियोजित साजिश बताया। धामी के अनुसार, ऐसे मामलों में सरकारी जमीन पर दावा जताने के लिए नीली, पीली या हरी रंग की चादरें लगाए जाने की बात सामने आई।
धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने ऐसी जमीनों को वापस लिया है। उनके मुताबिक, उत्तराखंड में इस कार्रवाई के तहत 13,000 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन वापस ली गई। यह आंकड़ा मुख्यमंत्री के बयान के अनुसार है। उपलब्ध सामग्री में जमीनों के जिलावार विवरण, कार्रवाई की तारीख या संबंधित मामलों की कानूनी स्थिति नहीं बताई गई है।
मदरसा बोर्ड को लेकर बयान
धामी ने यह भी कहा कि उत्तराखंड भारत का पहला राज्य बन गया है, जिसने अपना मदरसा बोर्ड खत्म किया। उनके अनुसार, इसकी जगह अल्पसंख्यक शिक्षा के लिए एक प्राधिकरण बनाया गया है।
मुख्यमंत्री के बयान में महिलाओं का स्वरोजगार, राज्य में लागू किए गए कानून और सरकारी जमीन से जुड़े अभियान 3 प्रमुख मुद्दे रहे। इनमें महिलाओं के उत्पादों की बढ़ती मांग को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़कर बताया गया।
बनबसा उत्तराखंड के चंपावत जिले में भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित है। मुख्यमंत्री के संबोधन का आयोजन किस कार्यक्रम के तहत हुआ, इसकी अलग जानकारी की जानकारी अभी नहीं है।
निष्कर्ष
बनबसा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महिलाओं के बढ़ते स्वरोजगार को राज्य की आर्थिक प्रगति से जोड़ा। उन्होंने समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण और दंगा-रोधी कानूनों का उल्लेख करते हुए 13,000 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन वापस लेने तथा मदरसा बोर्ड की जगह प्राधिकरण बनाने का दावा किया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह बयान कहां दिया?
उन्होंने यह बयान बनबसा में दिया।
Q. धामी ने महिलाओं के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि कई महिलाएं अपने उद्यम चला रही हैं और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बना रही हैं। उनके मुताबिक, महिलाओं का स्वरोजगार बढ़ रहा है।
Q. धामी ने समान नागरिक संहिता को लेकर क्या दावा किया?
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बना।
Q. सरकारी जमीन को लेकर मुख्यमंत्री ने क्या आंकड़ा दिया?
धामी ने कहा कि राज्य में 13,000 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन वापस ली गई है।
Q. ‘लैंड जिहाद’ के बारे में उन्होंने क्या कहा?
उन्होंने इसे सरकारी जमीन पर बड़े स्तर पर अवैध कब्जे से जुड़ी कथित सुनियोजित साजिश बताया।
Q. मदरसा बोर्ड को लेकर मुख्यमंत्री का क्या कहना था?
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने मदरसा बोर्ड खत्म कर उसकी जगह अल्पसंख्यक शिक्षा के लिए एक प्राधिकरण बनाया है।













