बागेश्वर के भैरूचपट्टा गांव के ग्रामीणों का खड़िया खदानों के संचालन पर रोक के विरोध में अनिश्चितकालीन धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। ग्रामीण जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर दिन-रात धरने पर बैठे हैं।

ग्रामीणों ने खदानें बंद करने का वैधानिक आधार स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने संबंधित आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने, मामले की जांच कराने और उचित कार्रवाई की मांग भी उठाई है।

आजीविका प्रभावित होने का दावा

ग्रामीणों का कहना है कि गांव के अधिकांश परिवारों की आजीविका खड़िया खनन पर निर्भर है। खनन और मजदूरी से होने वाली आय से परिवारों का भरण-पोषण होता है। उनका कहना है कि खदानें बंद होने के बाद ग्रामीणों और मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि एक ओर पलायन रोकने और स्थानीय स्तर पर रोजगार देने की बात की जाती है, जबकि दूसरी ओर खदानों का संचालन बंद होने से उनकी आय प्रभावित हो रही है।

आदेश और जांच से जुड़े अभिलेख मांगने की बात

अधिवक्ता बसंत कुमार ने कहा कि प्रशासन से खनन बंद करने से जुड़े आदेश, निरीक्षण रिपोर्ट और कार्रवाई के कानूनी आधार से संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने की मांग की गई है। संबंधित न्यायालयों और शासन के आदेशों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने को भी कहा गया है।

ग्रामीणों ने मामले की तत्काल जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग दोहराई है। उन्होंने प्रभावित लोगों की आजीविका के लिए समाधान निकालने की भी मांग की है।

निष्कर्ष

भैरूचपट्टा के ग्रामीण खड़िया खदानों पर रोक के विरोध में तीसरे दिन भी धरने पर रहे। उनकी मुख्य मांग खनन बंद करने का वैधानिक आधार और संबंधित अभिलेख स्पष्ट करना है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. ग्रामीणों का धरना कहां चल रहा है?

ग्रामीण जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं।

Q. धरना कितने दिन से जारी है?

धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। ग्रामीण इसे अनिश्चितकालीन बता रहे हैं।

Q. ग्रामीण किस बात का विरोध कर रहे हैं?

वे खड़िया खदानों के संचालन पर लगी रोक का विरोध कर रहे हैं।

Q. ग्रामीणों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

वे खनन रोकने का वैधानिक आधार और संबंधित आदेशों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने मामले की जांच और उचित कार्रवाई की मांग भी की है।

Q. खदानें बंद होने से क्या असर बताया गया है?

ग्रामीणों के अनुसार, खनन और मजदूरी से जुड़े परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है।