हरिद्वार, उत्तराखंड में योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि भगवती का दर्शन केवल छोटी बच्चियों या कन्याओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, हर नाम, रूप और जीव में देवी भगवती को देखना भारतीय और सनातन परंपरा की दिव्य दृष्टि है।
बाबा रामदेव ने कहा कि जिस व्यक्ति में यह दृष्टि होती है, उसके मन में नीच इच्छा के लिए कोई जगह नहीं रहती। उन्होंने महिलाओं और बेटियों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों को रोकने के लिए देश में मजबूत व्यवस्था बनाने की जरूरत बताई।
महिलाओं की सुरक्षा पर जोर
योग गुरु ने कहा कि भारत में ऐसी प्रणाली स्थापित होनी चाहिए, जिसमें किसी मां, बहन या बेटी को कभी ऐसे अत्याचार का शिकार न होना पड़े। उन्होंने इस लक्ष्य को नवरात्रि की पूजा का वास्तविक सार बताया।
उनके अनुसार, केवल पूजा-पाठ पर्याप्त नहीं है। नवरात्रि की भावना तभी पूरी मानी जाएगी, जब समाज में महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को व्यवहार में जगह मिले।
बाबा रामदेव ने अपने बयान में देवी भगवती को सभी जीवों में देखने की बात कही। उन्होंने इस विचार को भारत की सनातन परंपरा और उसकी आध्यात्मिक दृष्टि से जोड़ा।
यह बयान हरिद्वार में दिया गया। इसमें उन्होंने किसी विशेष घटना, मामले या आरोपी का उल्लेख नहीं किया, बल्कि महिलाओं के खिलाफ अत्याचार रोकने के लिए व्यापक सामाजिक और व्यवस्थागत बदलाव की अपील की।
निष्कर्ष
बाबा रामदेव ने हर जीव में भगवती का दर्शन करने की बात कहते हुए महिलाओं की सुरक्षा के लिए ऐसी व्यवस्था बनाने पर जोर दिया, जिसमें मां, बहन और बेटी अत्याचार से सुरक्षित रहें। उन्होंने इसे नवरात्रि पूजा की वास्तविक भावना बताया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. बाबा रामदेव ने यह बयान कहां दिया?
यह बयान हरिद्वार, उत्तराखंड में दिया गया।
Q. बाबा रामदेव ने भगवती के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि भगवती का दर्शन केवल कन्याओं में नहीं, बल्कि हर नाम, रूप और जीव में होना चाहिए।
Q. उन्होंने किस तरह की व्यवस्था बनाने की अपील की?
उन्होंने ऐसी व्यवस्था बनाने की अपील की, जिसमें किसी मां, बहन या बेटी को अत्याचार का शिकार न होना पड़े।
Q. उन्होंने इस विचार को किस परंपरा से जोड़ा?
उन्होंने इसे सनातन परंपरा और भारत की दिव्य दृष्टि से जोड़ा।
Q. बाबा रामदेव ने नवरात्रि पूजा का वास्तविक सार किसे बताया?
उन्होंने महिलाओं को अत्याचार से बचाने वाली व्यवस्था को नवरात्रि पूजा का वास्तविक सार बताया।












