बागेश्वर में पिंडारी ग्लेशियर से जोहार वैली तक ट्रेल पास तैयार करने निकला 16 पर्वतारोहियों का दल खराब मौसम के कारण वापस लौट आया। करीब 52 घंटे तक चले बर्फीले तूफान और लगातार बर्फबारी ने रास्ते में आगे बढ़ना जोखिम भरा बना दिया था। दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं।
देवभूमि एडवेंचर की टीम 21 सितंबर को खाती से रवाना हुई थी। 24 सितंबर को सभी सदस्य एडवांस बेस कैंप पहुंच गए। इसके अगले दिन 25 सितंबर की रात करीब 8:00 बजे क्षेत्र में तेज बर्फबारी और तूफान शुरू हुआ, जो लगभग 52 घंटे तक चलता रहा।
मौसम की स्थिति नहीं सुधरने पर दल शुक्रवार को वाछम-दऊ-जैकुनि तक लौट आया। अभियान के नेतृत्वकर्ता दिनेश सिंह दानू के मुताबिक, करीब 16,500 फीट की ऊंचाई पर आगे जाना दल की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं था।
रास्ता बनाने के बाद भी रोकना पड़ा अभियान
दल ने करीब 200 मीटर ऊंची रॉक वॉल पर रस्सियों की मदद से रास्ता तैयार किया था। हालांकि, लगातार गिरती बर्फ ने इस तैयारी को भी बेअसर कर दिया। अभियान में इस्तेमाल होने वाला लगभग पूरा सामान करीब 10 फीट बर्फ के नीचे दब गया।
इन हालात में टीम ने आगे बढ़ने के बजाय सुरक्षित वापसी का फैसला किया। दिनेश सिंह दानू ने बताया कि यह उनका सातवां ट्रेल पास अभियान था। उन्होंने भविष्य में इस ट्रैक को पूरा करने की कोशिश जारी रखने की बात कही।
दल में बंगलौर के अरुण जोशी, पटना के मृगंग, दिल्ली के नंद किशोर और कोलकाता के अजोय चक्रवर्ती भी शामिल थे। संदीप और प्रशांत समेत अन्य सदस्य भी अभियान का हिस्सा थे।
निष्कर्ष
52 घंटे की बर्फबारी और तूफान के बाद ऊंचाई वाले क्षेत्र में अभियान रोकना पड़ा। दल सुरक्षित लौट आया, लेकिन भारी बर्फ के कारण उसका सामान दब गया और ट्रेल पास पूरा नहीं हो सका।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. यह पर्वतारोहण दल किस अभियान पर निकला था?
दल पिंडारी ग्लेशियर को जोहार वैली से जोड़ने के उद्देश्य से ट्रेल पास अभियान पर निकला था।
Q. दल में कितने पर्वतारोही थे?
देवभूमि एडवेंचर के इस दल में 16 सदस्य थे।
Q. टीम कब खाती से रवाना हुई थी?
दल 21 सितंबर को खाती से रवाना हुआ था और 24 सितंबर को एडवांस बेस कैंप पहुंचा था।
Q. मौसम कितने समय तक खराब रहा?
25 सितंबर की रात करीब 8:00 बजे शुरू हुई बर्फबारी और तेज तूफान लगभग 52 घंटे तक जारी रहा।
Q. दल को वापस क्यों लौटना पड़ा?
करीब 16,500 फीट की ऊंचाई पर लगातार बर्फबारी और खराब मौसम के कारण आगे बढ़ना जोखिम भरा हो गया था।
Q. अभियान के सामान के साथ क्या हुआ?
अभियान का लगभग पूरा सामान करीब 10 फीट बर्फ के नीचे दब गया।
Q. क्या सभी पर्वतारोही सुरक्षित लौट आए?
हां, सभी सदस्य सुरक्षित लौट आए और दल वाछम-दऊ-जैकुनि तक वापस पहुंचा।









