कोटद्वार के 2 युवाओं ने लैपटॉप चार्जिंग की समस्या का समाधान निकालते हुए स्मार्ट चार्जिंग लैपटॉप बैग तैयार किया है। पावरबैग नाम का यह बैग यात्रा के दौरान लैपटॉप और मोबाइल चार्ज करने की सुविधा देता है। इसे जल्द बाजार में उपलब्ध कराने की तैयारी है।

यह पहल प्राणवीर सिंह प्रौद्योगिकी संस्थान (पीएसआईटी) कानपुर की छात्रा श्रुति गुप्ता और इसी संस्थान से बीबीए कर चुके ध्रुव अग्रवाल ने की है। दोनों ने अपने 2 अन्य दोस्तों के साथ मिलकर एडास पावर सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के तहत इस चार्जिंग बैग को विकसित किया है।

कॉलेज प्रोजेक्ट के दौरान आया विचार

ध्रुव अग्रवाल के अनुसार, बीबीए के दूसरे वर्ष में कॉलेज प्रोजेक्ट पर काम करते समय उन्हें लैपटॉप चार्ज करने में परेशानी हुई। जिस जगह वह प्रोजेक्ट तैयार कर रहे थे, वहां पावर प्वाइंट नहीं था। इसके कारण उनका काम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा था।

उन्हें लगा कि मोबाइल फोन को पावरबैंक से आसानी से चार्ज किया जा सकता है, लेकिन लैपटॉप के लिए ऐसा सुविधाजनक साधन उपलब्ध नहीं है। इसी अनुभव से यात्रा के दौरान लैपटॉप और मोबाइल चार्ज करने वाले बैग का विचार आया।

9 महीने में तैयार हुआ पावरबैग

टीम ने इस विचार पर काम करते हुए करीब 9 महीने में पावरबैग तैयार किया। इसे विकसित करने में करीब ढाई लाख रुपये खर्च हुए। बैग को इस तरह तैयार किया गया है कि यात्रा के दौरान लैपटॉप और मोबाइल चार्ज किए जा सकें।

इस प्रोजेक्ट में श्रुति गुप्ता कंप्यूटर साइंस (एआई) में बीटेक के चौथे वर्ष की छात्रा हैं। ध्रुव अग्रवाल पीएसआईटी कानपुर से बीबीए पूरा कर चुके हैं। दोनों ने 2 अन्य दोस्तों के साथ मिलकर इस आइडिया को स्टार्टअप का रूप दिया।

टीम के मुताबिक, पावरबैग जल्द बाजार में उपलब्ध होगा। फिलहाल इसकी कीमत, बिक्री की तारीख और चार्जिंग क्षमता का विवरण की जानकारी अभी नहीं है।

निष्कर्ष

कॉलेज प्रोजेक्ट के दौरान सामने आई लैपटॉप चार्जिंग की समस्या ने कोटद्वार के युवाओं को पावरबैग विकसित करने की प्रेरणा दी। करीब 9 महीने और ढाई लाख रुपये की लागत से तैयार यह स्मार्ट बैग जल्द बाजार में आने की उम्मीद है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. पावरबैग क्या है?

पावरबैग एक स्मार्ट चार्जिंग लैपटॉप बैग है। इससे यात्रा के दौरान लैपटॉप और मोबाइल चार्ज किए जा सकेंगे।

Q. पावरबैग किसने बनाया है?

इसे श्रुति गुप्ता और ध्रुव अग्रवाल ने अपने 2 अन्य दोस्तों के साथ मिलकर विकसित किया है।

Q. यह आइडिया कैसे आया?

ध्रुव अग्रवाल को कॉलेज प्रोजेक्ट के दौरान लैपटॉप चार्ज करने में परेशानी हुई थी। इसी अनुभव से चार्जिंग बैग बनाने का विचार आया।

Q. पावरबैग तैयार करने में कितना समय लगा?

इसे तैयार करने में करीब 9 महीने का समय लगा।

Q. इसे बनाने में कितनी लागत आई?

पावरबैग विकसित करने में करीब ढाई लाख रुपये खर्च हुए।