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द्रोणागिरी में हनुमान का मंचन नहीं, पहाड़ को बचाने की मान्यता अब विकास पर सवाल उठाती है

Chamoli

द्रोणागिरी में हनुमान का मंचन नहीं, पहाड़ को बचाने की मान्यता अब विकास पर सवाल उठाती है

चमोली के तिब्बत सीमा के पास बसे द्रोणागिरी गांव में हनुमान को नहीं पूजा जाता। ग्रामीण मानते हैं कि संजीवनी की तलाश में उनके आराध्य पर्वत का हिस्सा ले जाया गया था। गांव की रामलीला की यह परंपरा अब उत्तराखंड में पहाड़ों के बदलते हालात पर भी सवाल खड़े करती है।

06 Oct 2026

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