उत्तरकाशी जिले की यमुनोत्री विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव से पहले विकास और राजनीतिक समीकरण दोनों चर्चा में हैं। 2022 में कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव जीतने वाले संजय डोभाल के सामने अब अपने कार्यकाल का हिसाब देने की चुनौती है। स्थानीय लोग अस्पताल, शिक्षा, सड़क, यातायात और यमुनोत्री धाम के विकास को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
यमुनोत्री चारधाम यात्रा के पहले धाम से जुड़ी विधानसभा सीट है। यहां पहाड़ी गांवों, कृषि, सीमावर्ती इलाकों और यात्रा मार्ग की वजह से विकास के मुद्दे अलग महत्व रखते हैं। राज्य गठन के बाद इस सीट पर 5 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। कांग्रेस, भाजपा, उत्तराखंड क्रांति दल और निर्दलीय प्रत्याशी यहां जीत दर्ज कर चुके हैं।
विधायक ने स्वास्थ्य और सड़कों पर रखी अपनी बात
निर्दलीय विधायक संजय डोभाल का कहना है कि उन्होंने 2022 का चुनाव स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार के मुद्दों पर लड़ा था। उनका आरोप है कि यमुना घाटी में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी अब भी बनी हुई है। सरकार आश्वासन देती है, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों को क्षेत्र में स्थायी तैनाती नहीं मिलती।
डोभाल के अनुसार, बड़कोट, खादी, हनुमान चट्टी, चिन्यालीसौड़ और बंचवाड़ा में MBBS डॉक्टर उपलब्ध हैं, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। उन्होंने क्षेत्र की कई सड़कों के वन विभाग की NOC और NGT मानकों के कारण अटके होने की बात भी कही।
विधायक ने कहा कि यमुनोत्री धाम से जुड़े स्वरोजगार के अवसरों पर सरकार को ज्यादा ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक, रोपवे का काम ढाई साल पहले फिर शुरू हुआ था, लेकिन अभी तक आगे नहीं बढ़ पाया है।
डोभाल ने अपने कार्यकाल में चिन्यालीसौड़ और बड़कोट में महाविद्यालय भवन, पॉलिटेक्निक भवन और छात्रावास जैसे कामों का उल्लेख किया। उनका दावा है कि चुनाव से पहले यमुनोत्री विधानसभा की लगभग 40 से 50 सड़कों पर डामरीकरण और नए काम पूरे हो जाएंगे।
पूर्व विधायक ने कार्यकाल पर उठाए सवाल
भाजपा नेता और पूर्व विधायक केदार सिंह रावत ने संजय डोभाल के कार्यकाल पर असंतोष जताया है। रावत का कहना है कि पिछले 5 साल में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं में खास प्रगति नहीं हुई।
रावत ने अपने कार्यकाल के दौरान चिन्यालीसौड़ और बड़कोट की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की इमारतों, डॉक्टरों की तैनाती, अल्ट्रासाउंड, डिजिटल एक्स-रे, आईसीयू बेड, डेंटल केयर और एंबुलेंस जैसी व्यवस्थाएं कराने का दावा किया।
उन्होंने डोभाल के कार्यकाल में बुनियादी विकास की रफ्तार पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्षेत्र की सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पानी से जुड़ी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।
स्थानीय लोगों की प्राथमिकताएं
स्थानीय निवासी किशन चौहान ने यमुनोत्री विधानसभा में अस्पतालों की हालत पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज और विश्वविद्यालय नहीं है। चौहान के मुताबिक, पिछले 7 साल में विकास के नाम पर कोई बड़ा काम दिखाई नहीं दिया।
चौहान ने क्षेत्र के लिए युवा और नया चेहरा सामने आने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, ऐसा प्रतिनिधि होना चाहिए जो सड़क, विश्वविद्यालय और मेडिकल कॉलेज के मुद्दों पर काम कर सके। स्थानीय निवासी महावीर पंवार ने भी कहा कि लोग बदलाव के मूड में हैं और एक युवा, उभरते चेहरे की तलाश कर रहे हैं।
कुमार ने मिशन यमुनोत्री जनपद, यमुनोत्री धाम के कायाकल्प और केदारनाथ की तर्ज पर मास्टरप्लान को लंबे समय से लंबित मुद्दे बताया। उन्होंने बड़कोट में जाम से राहत के लिए रिंग रोड या बायपास बनाने की मांग भी उठाई।
स्थानीय निवासी अमित रावत का कहना है कि 2027 में भाजपा की सरकार बने और यमुनोत्री से भी भाजपा का विधायक चुना जाए। उनका तर्क है कि सरकार में रहने वाला विधायक क्षेत्र की समस्याओं के लिए बेहतर बजट और विकास कार्य ला सकता है।
दल-बदल से बदले चुनावी समीकरण
भाजपा के लिए यमुनोत्री सीट पर दीपक बिज्लवाण की एंट्री महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बिज्लवाण 2022 में कांग्रेस के टिकट पर यमुनोत्री से चुनाव लड़ चुके हैं। वह पहले NSUI और यूथ कांग्रेस से जुड़े रहे हैं तथा उत्तरकाशी जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुके हैं। अब वह भाजपा में शामिल हो चुके हैं और उन्हें पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी मिली है।
बिज्लवाण के भाजपा में जाने से पार्टी को एक मजबूत चेहरा मिला है। हालांकि, उनकी बढ़ती राजनीतिक भूमिका से पुराने भाजपा नेताओं में असंतोष की बात भी सामने आ रही है। यह स्थिति भाजपा के भीतर टिकट और नेतृत्व को लेकर समीकरण बदल सकती है, लेकिन अंतिम चुनावी तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है।
दूसरी ओर, 2017 में भाजपा के टिकट पर यमुनोत्री से जीतने वाले केदार सिंह रावत के कांग्रेस में लौटने की चर्चा है। रावत 2007 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक रह चुके हैं। वह 2017 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए थे। इसलिए उनकी संभावित वापसी को यमुनोत्री की राजनीति में अहम माना जा रहा है।
यमुनोत्री में अब मुकाबला केवल मौजूदा निर्दलीय विधायक के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा। संजय डोभाल को अपने काम और स्थानीय असंतोष के बीच समर्थन बनाए रखना होगा। भाजपा के सामने दीपक बिज्लवाण की भूमिका और पुराने नेता केदार सिंह रावत से जुड़े संभावित बदलावों को संभालने की चुनौती होगी। कांग्रेस के लिए भी यह सीट नए समीकरण के साथ वापसी का अवसर बन सकती है।
निष्कर्ष
यमुनोत्री में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, रोजगार, यातायात और धाम के मास्टरप्लान जैसे मुद्दे चुनाव से पहले केंद्र में हैं। निर्दलीय विधायक संजय डोभाल अपने कार्यकाल के काम गिना रहे हैं, जबकि स्थानीय असंतोष और संभावित दल-बदल 2027 के मुकाबले को महत्वपूर्ण बना रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. यमुनोत्री के मौजूदा विधायक कौन हैं?
संजय डोभाल यमुनोत्री के निर्दलीय विधायक हैं। उन्होंने 2022 में कांग्रेस से बगावत कर चुनाव जीता था।
Q. यमुनोत्री में स्थानीय लोग किन मुद्दों पर सवाल उठा रहे हैं?
स्थानीय लोग स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, यातायात, रोजगार और यमुनोत्री धाम के विकास से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं।
Q. संजय डोभाल ने किन कामों का दावा किया है?
उन्होंने चिन्यालीसौड़ और बड़कोट में महाविद्यालय भवन, पॉलिटेक्निक भवन और छात्रावास जैसे कामों का उल्लेख किया है।
Q. दीपक बिज्लवाण का यमुनोत्री से क्या संबंध है?
दीपक बिज्लवाण 2022 में कांग्रेस के टिकट पर यमुनोत्री से चुनाव लड़ चुके हैं। अब वह भाजपा में शामिल हो चुके हैं और उन्हें पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी मिली है।
Q. केदार सिंह रावत को लेकर क्या चर्चा है?
2017 में भाजपा से यमुनोत्री जीतने वाले केदार सिंह रावत के कांग्रेस में लौटने की चर्चा चल रही है। वह 2007 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक रह चुके हैं।
Q. यमुनोत्री धाम से जुड़ा कौन-सा मुद्दा लंबित बताया गया है?
मिशन यमुनोत्री जनपद, धाम के कायाकल्प और केदारनाथ की तर्ज पर मास्टरप्लान को लंबित मुद्दा बताया गया है।











