चमोली जिले की नीती घाटी में ग्लेशियरों और हिमखंडों से जुड़े जोखिम वाले क्षेत्रों की निगरानी मजबूत करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए वैज्ञानिकों का दल बृहस्पतिवार को सीमांत क्षेत्र के लिए रवाना हुआ। टीम वहां अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करेगी।

दल को प्रशासन से इनर लाइन की अनुमति मिलने के बाद आगे भेजा गया। वैज्ञानिकों के साथ अलग-अलग विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी इस अभियान में शामिल हैं। नीती घाटी के उन इलाकों पर ध्यान दिया जा रहा है, जहां ग्लेशियर या हिमखंड दुर्घटना का खतरा पैदा कर सकते हैं।

नेपाल की आपदा के बाद बढ़ी सतर्कता

पिछले महीने नेपाल में आई आपदा के बाद भारत में भी खतरा बने ग्लेशियरों और हिमखंडों को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। इसी क्रम में दुर्घटना की आशंका वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं।

अर्ली वार्निंग सिस्टम का काम संभावित खतरे वाले इलाकों में समय रहते चेतावनी की व्यवस्था तैयार करना है। नीती घाटी में वैज्ञानिक दल की तैनाती इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सिस्टम के मॉडल, इसकी संख्या और स्थापना की समयसीमा नहीं बताई गई है।

प्रशासन ने दी जानकारी

उपजिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि वैज्ञानिकों की टीम नीती घाटी में सिस्टम स्थापित करेगी। उनके अनुसार, इस काम में अन्य विभागों के कर्मचारी और अधिकारी भी दल के साथ मौजूद हैं।

सीमांत क्षेत्र होने के कारण टीम को इनर लाइन की अनुमति लेने के बाद रवाना किया गया। फिलहाल अभियान का घोषित फोकस ग्लेशियर और हिमखंड प्रभावित क्षेत्रों में चेतावनी व्यवस्था स्थापित करना है।

निष्कर्ष

नीती घाटी में वैज्ञानिकों और विभागीय टीम की मौजूदगी से ग्लेशियर तथा हिमखंड प्रभावित इलाकों में अर्ली वार्निंग व्यवस्था विकसित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। यह कदम नेपाल की आपदा के बाद बढ़ाई गई सतर्कता के तहत उठाया जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. नीती घाटी में वैज्ञानिकों की टीम क्यों भेजी गई है?

वैज्ञानिकों की टीम ग्लेशियर और हिमखंड प्रभावित क्षेत्रों में अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने के लिए भेजी गई है।

Q. टीम नीती घाटी के लिए कब रवाना हुई?

टीम बृहस्पतिवार को सीमांत क्षेत्र के लिए रवाना हुई।

Q. क्या टीम को सीमांत क्षेत्र में जाने की अनुमति मिली थी?

हां, प्रशासन से इनर लाइन की अनुमति लेने के बाद टीम को रवाना किया गया।

Q. इस अभियान में वैज्ञानिकों के अलावा कौन शामिल है?

दल के साथ अन्य विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं।

Q. अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की जरूरत क्यों पड़ी?

नेपाल में पिछले महीने आई आपदा के बाद भारत में ग्लेशियरों और हिमखंडों को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। इसी के तहत दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सिस्टम लगाए जा रहे हैं।