नैनीताल। आसमान देखने वालों के लिए 21 अक्तूबर की रात खास रहने वाली है। हैलिस धूमकेतु के मलबे से बनने वाली ओरियोनिड उल्का बौछार 21 अक्तूबर की रात से 22 अक्तूबर की अल सुबह तक अपने चरम पर रहेगी। साफ और प्रदूषण रहित आसमान में हर घंटे करीब 20 उल्काएं दिखाई देने की संभावना है।

ओरियोनिड उल्काएं तेज गति और चमकदार लकीरों के लिए जानी जाती हैं। हैलिस धूमकेतु से निकले मलबे के कण जब पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो घर्षण के कारण गर्म होकर चमकने लगते हैं। इसी प्रक्रिया से रात के आसमान में रोशनी की लकीरें बनती हैं।

तड़के 3 बजे से बेहतर होगा नजारा

इस बार चंद्रमा की रोशनी उल्का बौछार देखने में कुछ बाधा डाल सकती है। उस रात आसमान में करीब 77 फीसदी चमकीला बढ़ता हुआ चंद्रमा रहेगा। इसकी रोशनी के कारण कम चमक वाली कई उल्काएं आंखों से दिखाई नहीं देंगी।

भारत में इसे देखने का बेहतर समय आधी रात के बाद तड़के 3 बजे से सूर्योदय से ठीक पहले तक बताया गया है। इस अवधि के आसपास चंद्रमा अस्त हो जाएगा और आसमान अधिक अंधेरा हो जाएगा। इस दौरान उल्काओं को देखने के लिए दूरबीन या किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं होगी।

दर्शकों को खुले और अंधेरे स्थान से आसमान देखने की सलाह दी गई है। नैनीताल जैसे अपेक्षाकृत साफ वातावरण वाले इलाकों में रोशनी कम होने पर चमकीली लकीरें देखने का अवसर बेहतर हो सकता है।

नॉर्दर्न टॉरिड और ग्रह भी दिखेंगे

इसी सप्ताह नॉर्दर्न टॉरिड उल्का बौछार भी शुरू हो रही है। इसके चलते कभी-कभी बेहद चमकीले आग के गोले दिखाई देने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, इनके दिखने का कोई निश्चित समय या संख्या उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है।

रात के आसमान में सौरमंडल के बड़े ग्रह बृहस्पति और मंगल भी चमकते हुए दिखाई देंगे। एरीज के वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र यादव ने लोगों से तड़के खुले और अंधेरे स्थान पर जाकर इस आकाशीय घटना को देखने की अपील की है।

निष्कर्ष

ओरियोनिड उल्का बौछार 21 अक्तूबर की रात से 22 अक्तूबर की सुबह तक अपने चरम पर रहेगी। चंद्रमा की रोशनी के बावजूद तड़के 3 बजे से सूर्योदय से पहले तक साफ और अंधेरे स्थानों से हर घंटे करीब 20 उल्काएं दिखाई दे सकती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. ओरियोनिड उल्का बौछार कब चरम पर रहेगी?

21 अक्तूबर की रात से 22 अक्तूबर की अल सुबह तक यह उल्का बौछार अपने चरम पर रहेगी।

Q. हर घंटे कितनी उल्काएं दिखाई दे सकती हैं?

साफ और प्रदूषण रहित आसमान में हर घंटे करीब 20 उल्काएं दिखाई देने की संभावना है।

Q. इसे देखने का सबसे अच्छा समय क्या है?

भारत में तड़के 3 बजे से सूर्योदय से ठीक पहले तक इसे देखने का बेहतर समय बताया गया है।

Q. क्या इसे देखने के लिए दूरबीन जरूरी है?

नहीं, उल्काओं को बिना दूरबीन या किसी खास उपकरण के नग्न आंखों से देखा जा सकता है।

Q. चंद्रमा की रोशनी का क्या असर पड़ेगा?

करीब 77 फीसदी चमकीले चंद्रमा की रोशनी के कारण कम चमक वाली कुछ उल्काएं दिखाई नहीं दे सकती हैं।

Q. इस दौरान और क्या दिखाई देगा?

नॉर्दर्न टॉरिड उल्का बौछार के साथ बृहस्पति और मंगल भी रात के आसमान में दिखाई देंगे।