नैनीताल स्थित कुमाऊं विश्वविद्यालय में डिग्रियों की छपाई को लेकर चला आ रहा गतिरोध खत्म हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने डिग्रियों और अंकपत्रों की छपाई के लिए री-टेंडरिंग प्रक्रिया पूरी कर ली है। अब प्रमाणपत्र और डिग्रियां तैयार करने का काम जल्द शुरू होने की उम्मीद है।

इस प्रक्रिया के अटकने से विश्वविद्यालय से जुड़े परिसरों और महाविद्यालयों के सैकड़ों विद्यार्थी कई महीनों से अपनी डिग्रियों का इंतजार कर रहे थे। डिग्री नहीं मिलने से नौकरी और आगे की पढ़ाई से जुड़े कामों में उन्हें परेशानी हो रही थी। टेंडर पूरा होने के बाद ऐसे विद्यार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

खबर प्रकाशित होने के बाद प्रक्रिया में तेजी

डिग्रियों की छपाई में देरी को लेकर अमर उजाला ने 16 अक्तूबर के अंक में खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रक्रिया में तेजी दिखाई। तकनीकी और सुरक्षा मानकों से जुड़ी आपत्तियों के कारण टेंडर प्रक्रिया लंबे समय से पूरी नहीं हो पा रही थी।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. रीतेश साह ने बताया कि डिग्रियों और अंकपत्रों की छपाई में सुरक्षा और गुणवत्ता के मानकों का सख्ती से पालन जरूरी है। इसी वजह से तकनीकी स्तर पर प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने में समय लगा।

आपात जरूरत वाले विद्यार्थियों को प्राथमिकता

कुलसचिव के अनुसार, जिन छात्र-छात्राओं को डिग्री की तत्काल जरूरत है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर प्रमाणपत्र दिए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य यह है कि नौकरी या आगे की पढ़ाई से जुड़े उनके काम प्रभावित न हों।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि बाकी विद्यार्थियों को भी जल्द डिग्रियां मिलनी शुरू हो जाएंगी। हालांकि, सभी लंबित डिग्रियों के वितरण की अलग समयसीमा की जानकारी नहीं दी गई है।

निष्कर्ष

कुमाऊं विश्वविद्यालय में डिग्रियों की छपाई के लिए अटकी री-टेंडरिंग प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब छपाई शुरू होने से लंबे समय से इंतजार कर रहे विद्यार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जबकि आपात जरूरत वाले छात्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. कुमाऊं विश्वविद्यालय में डिग्रियों की छपाई की प्रक्रिया पूरी हुई है?

हां, डिग्रियों और अंकपत्रों की छपाई के लिए री-टेंडरिंग प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

Q. डिग्रियों की छपाई कब शुरू होगी?

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार छपाई का काम जल्द शुरू किया जाएगा।

Q. किन विद्यार्थियों को इस फैसले से राहत मिलेगी?

विश्वविद्यालय से जुड़े परिसरों और महाविद्यालयों के वे विद्यार्थी राहत पाएंगे, जो कई महीनों से डिग्रियों का इंतजार कर रहे हैं।

Q. आपात जरूरत वाले विद्यार्थियों के लिए क्या व्यवस्था है?

जिन विद्यार्थियों को डिग्री की तत्काल जरूरत है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर डिग्री दी जा रही है।

Q. टेंडर प्रक्रिया में देरी क्यों हुई?

तकनीकी और सुरक्षा मानकों को पूरा करने के कारण प्रक्रिया में समय लगा।