किच्छा अनाज मंडी में सरकारी धान खरीद की व्यवस्था पटरी से उतर गई है। मंडी में जगह-जगह धान के ढेर लगे हैं और कई किसान 10 से 15 दिन से अपनी फसल की रखवाली कर रहे हैं। किसानों को घरों से खाना मंगाकर मंडी में रहना पड़ रहा है।
धान खरीद के लिए मंडी में 4 केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 2 केंद्र खाद्य व सहकारिता आपूर्ति विभाग के हैं, जबकि 2 केंद्र सहकारी समितियों के हैं। इन केंद्रों पर अब तक बहुत कम धान खरीदा गया है। सहकारिता केंद्र पर 758 क्विंटल और सहकारी समिति के केंद्र पर 406 क्विंटल धान की तौल हुई है।
किसानों की सबसे बड़ी चिंता बारिश को लेकर है। उनका कहना है कि आसमान में बादल आते ही डर बढ़ जाता है, क्योंकि खुले में पड़ा धान भीगने से उनकी सालभर की कमाई प्रभावित हो सकती है। किसानों ने सरकार से खरीद प्रक्रिया तुरंत शुरू कराने की मांग की है।
खरीद पोर्टल शुरू नहीं होने से अड़चन
राज्य विपणन निरीक्षक कौशल कुमार ने बताया कि धान लेने वाली चावल मिलों का पंजीकरण अभी तक नहीं हो सका है। उनके अनुसार, पंजीकरण पूरा होने के बाद ही खरीद पोर्टल खुल पाएगा। इसी प्रक्रिया के अटकने से सरकारी खरीद में देरी हो रही है।
ग्राम पटेरी निवासी हृदयेश कुमार ने बताया कि उनका लगभग 350 क्विंटल धान मंडी में पड़ा है। उन्होंने बारिश होने पर पूरी फसल खराब होने की आशंका जताई। अंजनिया निवासी सतपाल सिंह 200 क्विंटल धान लेकर 28 सितंबर को मंडी पहुंचे थे। उनका कहना है कि तब से वह खरीद का इंतजार कर रहे हैं।
मलपुरा निवासी शकील अहमद 50 क्विंटल धान लेकर मंडी में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सुबह दलाल मंडी पहुंच जाते हैं और परेशान किसानों से कम कीमत पर धान खरीदने की कोशिश करते हैं। मलपुरा के मोहम्मद अहमद और मोहम्मद सादिक भी करीब एक पखवाड़े से अपनी फसल की खरीद का इंतजार कर रहे हैं।
किसानों को आशंका है कि दशहरे का पर्व आने पर मंडी में जगह नहीं होने का कारण बताकर खरीद टाली जा सकती है। उनका कहना है कि सरकारी केंद्रों पर जल्द तौल शुरू होनी चाहिए, ताकि उन्हें फसल की रखवाली के लिए लंबे समय तक मंडी में न रहना पड़े।
किसानों की मांग
किसानों ने सरकार से चावल मिलों का पंजीकरण पूरा कराने और सरकारी धान खरीद तत्काल शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि खुले में रखी फसल के कारण बारिश का खतरा बना हुआ है और देरी से उनकी परेशानी बढ़ रही है।
निष्कर्ष
किच्छा मंडी में 4 खरीद केंद्र होने के बावजूद अब तक 758 क्विंटल और 406 क्विंटल धान की ही तौल हुई है। चावल मिलों का पंजीकरण पूरा नहीं होने से पोर्टल शुरू नहीं हुआ है, जबकि किसान बारिश के डर के बीच खरीद का इंतजार कर रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. किच्छा मंडी में धान खरीद के लिए कितने केंद्र बनाए गए हैं?
मंडी में धान खरीद के लिए 4 केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 2 खाद्य व सहकारिता आपूर्ति विभाग और 2 सहकारी समितियों के केंद्र हैं।
Q. अब तक कितने धान की तौल हुई है?
सहकारिता केंद्र पर 758 क्विंटल और सहकारी समिति के केंद्र पर 406 क्विंटल धान की तौल हुई है।
Q. सरकारी धान खरीद में देरी की वजह क्या बताई गई है?
राज्य विपणन निरीक्षक कौशल कुमार के अनुसार, धान लेने वाली चावल मिलों का पंजीकरण अभी पूरा नहीं हुआ है। पंजीकरण के बाद ही खरीद पोर्टल खुल पाएगा।
Q. किसान कितने समय से मंडी में रुके हुए हैं?
कई किसान 10 से 15 दिन से मंडी में अपनी फसल की रखवाली कर रहे हैं। कुछ किसान करीब एक पखवाड़े से खरीद का इंतजार कर रहे हैं।
Q. किसानों ने सरकार से क्या मांग की है?
किसानों ने सरकारी धान खरीद तुरंत शुरू कराने की मांग की है।









