देहरादून में आईटीबीपी के उत्तरी सीमांत के महानिरीक्षक मनु महाराज ने उत्तराखंड कोऑपरेटिव, पशुपालन विभाग और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के बीच हुए समझौता ज्ञापन को महत्वपूर्ण पहल बताया है। उन्होंने कहा कि इस पहल से ‘वाइब्रेंट विलेजेज’ यानी सीमावर्ती गांवों के निवासियों को काफी लाभ मिला है।
मनु महाराज के अनुसार, योजना में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके तहत भुगतान सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचता है। इससे भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है और लाभार्थियों तक रकम सीधे पहुंचती है।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था ने पहले की जटिल खरीद प्रक्रियाओं से भी राहत दी है। बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि योजना के तहत कितने लाभार्थी जुड़े हैं या अब तक कितनी राशि भेजी गई है।
डीबीटी से भुगतान की व्यवस्था
आईटीबीपी अधिकारी ने बताया कि सीधे बैंक खाते में भुगतान होने से प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया गया है। इससे लाभार्थियों और संबंधित संस्थाओं के बीच भुगतान की प्रक्रिया सरल होने की बात कही गई है।
यह पहल उत्तराखंड कोऑपरेटिव, पशुपालन विभाग और आईटीबीपी के साझा MoU के तहत संचालित है। इसका लाभ वाइब्रेंट विलेजेज के निवासियों को मिलने की जानकारी दी गई है।
निष्कर्ष
आईटीबीपी के अनुसार, उत्तराखंड कोऑपरेटिव और पशुपालन विभाग के साथ हुआ MoU सीमावर्ती गांवों के लोगों के लिए उपयोगी साबित हुआ है। डीबीटी के जरिए सीधे बैंक खातों में भुगतान और जटिल खरीद प्रक्रिया से राहत इस पहल के प्रमुख बताए गए लाभ हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. यह MoU किन संस्थाओं के बीच हुआ है?
उत्तर: यह समझौता उत्तराखंड कोऑपरेटिव, पशुपालन विभाग और आईटीबीपी के बीच हुआ है।
Q. इस पहल का लाभ किसे मिला है?
उत्तर: आईटीबीपी के अनुसार, इसका लाभ वाइब्रेंट विलेजेज यानी सीमावर्ती गांवों के निवासियों को मिला है।
Q. भुगतान किस तरीके से किया जाता है?
उत्तर: योजना में डीबीटी व्यवस्था के तहत भुगतान सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा जाता है।
Q. डीबीटी व्यवस्था से क्या फायदा बताया गया है?
उत्तर: इससे भुगतान में पारदर्शिता आती है और रकम सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचती है।
Q. इस व्यवस्था से किस प्रक्रिया में राहत मिली है?
उत्तर: मनु महाराज के अनुसार, इससे पहले की जटिल खरीद प्रक्रियाओं से राहत मिली है।











