उत्तराखंड के चमोली जिले में करीब 16,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित वासुंधरा ताल में देश का पहला स्वदेशी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) चेतावनी सिस्टम स्थापित किया गया है। यह सिस्टम झील के जलस्तर और आसपास की संभावित जोखिम वाली गतिविधियों पर नजर रखेगा।
सीएसआईआर-सीबीआरआई रुड़की की 15 सदस्यीय टीम ने इस सिस्टम को लगाने के लिए आईटीबीपी बेस कैंप से 16 किलोमीटर का ट्रेक पूरा किया। टीम ने ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में सिस्टम की स्थापना के लिए 15 दिन काम किया।
इस सिस्टम का विकास सीबीआरआई ने करीब 61 लाख रुपये में किया है। निजी कंपनियों ने इसी तरह की व्यवस्था के लिए 8 करोड़ रुपये का अनुमान दिया था। इस तुलना में स्वदेशी सिस्टम की लागत काफी कम रही।
किन खतरों पर रखेगा नजर
वासुंधरा ताल में लगाया गया सिस्टम झील के जलस्तर के साथ कई दूसरे अहम संकेतकों को भी ट्रैक करेगा। इसमें हिमस्खलन, भूस्खलन, प्राकृतिक बांध और मौसम की स्थिति शामिल है। इन सभी जानकारियों से झील और उसके आसपास बदलते हालात की निगरानी की जा सकेगी।
सिस्टम सामान्य स्थिति में हर 2 घंटे में सैटेलाइट के जरिए डेटा भेजेगा। आपात स्थिति में यह जानकारी तुरंत भेजने की व्यवस्था रखी गई है। इससे झील से जुड़े किसी गंभीर बदलाव की सूचना मिलने में देरी कम करने में मदद मिलेगी।
वासुंधरा ताल से नीचे की ओर स्थित गांवों और कैंपों की मैपिंग पहले ही की जा चुकी है। इससे संभावित खतरे वाले क्षेत्र और नीचे बसे स्थानों की पहचान सिस्टम की निगरानी व्यवस्था से जोड़ी जा सकेगी।
पायलट के बाद दूसरे तालों पर विस्तार
इस सिस्टम का पायलट 6 से 8 महीने तक चलेगा। पायलट अवधि में इसके कामकाज और निगरानी व्यवस्था का आकलन किया जाएगा। इसके बाद इसे दूसरे ग्लेशियल तालों पर भी स्थापित करने की योजना है।
यह पहल ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ग्लेशियल झीलों से जुड़े जोखिमों की निगरानी के लिए बनाई गई है। सिस्टम से मिलने वाला डेटा जलस्तर, मौसम और प्राकृतिक बांध की स्थिति जैसे संकेतकों को लगातार समझने में उपयोगी होगा।
निष्कर्ष
वासुंधरा ताल में स्थापित स्वदेशी GLOF चेतावनी सिस्टम झील, मौसम और आसपास के प्राकृतिक खतरों की निगरानी करेगा। 6 से 8 महीने के पायलट के बाद इसे दूसरे ग्लेशियल तालों तक ले जाने की योजना है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. यह चेतावनी सिस्टम कहां लगाया गया है?
यह सिस्टम चमोली के करीब 16,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित वासुंधरा ताल में लगाया गया है।
Q. सिस्टम किस संस्था ने बनाया है?
इसे सीएसआईआर-सीबीआरआई रुड़की ने विकसित किया है।
Q. सिस्टम लगाने में टीम को कितना समय लगा?
15 सदस्यीय टीम ने इसे स्थापित करने के लिए 15 दिन काम किया।
Q. टीम वासुंधरा ताल तक कैसे पहुंची?
टीम ने आईटीबीपी बेस कैंप से 16 किलोमीटर का ट्रेक पूरा करके वहां पहुंच बनाई।
Q. सिस्टम कौन-कौन से खतरे ट्रैक करेगा?
यह जलस्तर, हिमस्खलन, भूस्खलन, प्राकृतिक बांध और मौसम की निगरानी करेगा।
Q. डेटा कितनी बार भेजा जाएगा?
सामान्य स्थिति में डेटा हर 2 घंटे में सैटेलाइट के जरिए भेजा जाएगा। आपात स्थिति में सूचना तुरंत भेजी जाएगी।
Q. सिस्टम का पायलट कितने समय चलेगा?
इसका पायलट 6 से 8 महीने तक चलेगा।
Q. क्या इसे दूसरे ग्लेशियल तालों पर भी लगाया जाएगा?
हां, पायलट के बाद इसे दूसरे ग्लेशियल तालों पर स्थापित करने की योजना है।











