देहरादून में उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोडियाल ने दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी मामले में गौतम का नाम सामने आने के बावजूद हुई नियुक्ति उत्तराखंड की महिलाओं का अपमान है।

गोडियाल ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी। उनके मुताबिक, अंकिता भंडारी मामले में आरोपियों को सजा मिलने तक पार्टी अपना विरोध जारी रखेगी।

गोडियाल ने क्या कहा

गणेश गोडियाल ने कहा कि दुष्यंत गौतम का नाम अंकिता भंडारी मामले में सामने आया है। ऐसे में उन्हें राज्यपाल नियुक्त किए जाने से उत्तराखंड की महिलाओं में गलत संदेश गया है। उन्होंने इस नियुक्ति को महिलाओं के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि मामले में जिन लोगों पर आरोप हैं, उन्हें सजा मिलने तक वे और उनकी पार्टी शांत नहीं रहेंगे। हालांकि, उपलब्ध बयान में मामले की जांच, आरोपियों की मौजूदा कानूनी स्थिति या किसी अदालत के फैसले की जानकारी नहीं दी गई है।

मामला अब राजनीतिक विरोध का मुद्दा

गोडियाल का बयान दुष्यंत गौतम की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस के राजनीतिक विरोध को सामने रखता है। उनका मुख्य सवाल यह है कि अंकिता भंडारी मामले से जुड़े नाम के बावजूद राज्यपाल पद पर नियुक्ति क्यों की गई।

इस बयान में नियुक्ति रद्द करने या किसी अन्य संवैधानिक कदम की स्पष्ट मांग का उल्लेख नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गोडियाल ने फिलहाल आरोपियों को सजा मिलने तक विरोध जारी रखने की बात कही है।

निष्कर्ष

उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोडियाल ने दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति को अंकिता भंडारी मामले से जोड़कर इसका विरोध किया है। उन्होंने आरोपियों को सजा मिलने तक आंदोलन और आवाज जारी रखने की बात कही।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. यह बयान किसने दिया?

गणेश गोडियाल ने यह बयान दिया है। वे उत्तराखंड कांग्रेस के अध्यक्ष हैं।

Q. बयान कहां से सामने आया?

यह बयान देहरादून से सामने आया है।

Q. विरोध किस नियुक्ति को लेकर है?

विरोध दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति को लेकर है।

Q. गोडियाल ने नियुक्ति पर क्या आरोप लगाया?

उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी मामले में गौतम का नाम सामने आने के बावजूद नियुक्ति हुई। गोडियाल ने इसे उत्तराखंड की महिलाओं का अपमान बताया।

Q. कांग्रेस कब तक विरोध जारी रखने की बात कह रही है?

गोडियाल ने कहा कि मामले के आरोपियों को सजा मिलने तक वे चुप नहीं बैठेंगे।