उत्तराखंड में कांग्रेस की ‘न्याय यात्रा’ शुरू होने के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘लोकतंत्र बचाओ’ अभियान का ऐलान किया। उन्होंने विपक्षी पार्टी पर संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया।

धामी ने कहा कि कांग्रेस की लगातार चुनावी हार का सिलसिला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद संभालने से कई दशक पहले शुरू हो गया था। उनके मुताबिक, पार्टी को लोगों का भरोसा दोबारा जीतने की कोशिश करनी चाहिए, लेकिन वह इसके बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रही है।

कांग्रेस की न्याय यात्रा के बीच बयान

कांग्रेस ने उत्तराखंड में गुरुवार को अपनी ‘न्याय यात्रा’ शुरू की। इसी घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री ने पार्टी की राजनीतिक रणनीति और उसके संस्थानों से जुड़े आरोपों पर प्रतिक्रिया दी।

धामी का बयान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस के रुख की आलोचना के तौर पर सामने आया। उन्होंने चुनावी नतीजों के लिए मौजूदा चुनाव आयुक्त को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश पर सवाल उठाया और कांग्रेस की पुरानी चुनावी स्थिति का जिक्र किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस को अपनी हार के कारणों पर विचार करने और जनता का भरोसा वापस पाने पर ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार, संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने से यह लक्ष्य हासिल नहीं होगा।

निष्कर्ष

उत्तराखंड में कांग्रेस की ‘न्याय यात्रा’ के जवाब में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘लोकतंत्र बचाओ’ अभियान की घोषणा की और पार्टी पर संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कांग्रेस की चुनावी हार को मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल से पहले का मुद्दा बताया।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. उत्तराखंड में कांग्रेस ने कौन-सी यात्रा शुरू की?

कांग्रेस ने गुरुवार को उत्तराखंड में ‘न्याय यात्रा’ शुरू की।

Q. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने क्या घोषणा की?

उन्होंने ‘लोकतंत्र बचाओ’ अभियान का ऐलान किया।

Q. धामी ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाया?

उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोगों का भरोसा जीतने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रही है।

Q. धामी ने कांग्रेस की चुनावी हार के बारे में क्या कहा?

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की चुनावी हार का सिलसिला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद संभालने से दशकों पहले शुरू हो गया था।

Q. धामी के बयान का संदर्भ क्या था?

यह बयान कांग्रेस की ‘न्याय यात्रा’ शुरू होने और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर उसके रुख के बीच आया।