दिल्ली में मछुआरा समुदाय के सदस्यों ने अनुसूचित जाति श्रेणी में शामिल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। समुदाय की मांग है कि उसके संवैधानिक अधिकारों को औपचारिक रूप से मान्यता देकर रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए।

उत्तर प्रदेश के मंत्री संजय निषाद ने प्रदर्शनकारियों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि मछुआरा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची से हटाया जाना चाहिए। उन्होंने इसे अनुसूचित जाति श्रेणी में सही तरीके से दर्ज करने की मांग रखी।

निषाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मछुआरा समुदाय को एक जाति के रूप में नहीं, बल्कि जातियों के समूह के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। उन्होंने इस संदर्भ में उत्तराखंड का उदाहरण दिया, जहां उनके अनुसार इसे एकल जाति नहीं बल्कि जातियों के समूह के रूप में स्वीकार किया गया है।

पारंपरिक रोजगार बहाल करने की मांग

मंत्री ने कहा कि मछुआरा समुदाय की पारंपरिक आजीविका जलाशयों, नदी किनारों और नदियों से जुड़ी रही है। उनके मुताबिक, समुदाय के लोगों से ये पारंपरिक रोजगार छिन गए हैं और इन्हें बहाल किया जाना चाहिए।

निषाद ने पिछली सरकारों पर समुदाय के साथ ईमानदार व्यवहार नहीं करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि पहले सरकारों ने समुदाय के वोट लिए, लेकिन उसके लोगों को असहाय छोड़ दिया।

मांग का मुख्य आधार

प्रदर्शन और मंत्री के बयान में समुदाय की मांग के 3 प्रमुख पहलू सामने आए हैं:

  • अनुसूचित जाति श्रेणी में औपचारिक दर्जा।
  • उत्तर प्रदेश में समुदाय को जातियों के समूह के रूप में मान्यता।
  • जलाशयों, नदी किनारों और नदियों से जुड़े पारंपरिक रोजगार की बहाली।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में इस मांग पर किसी सरकारी फैसले या आगे की आधिकारिक प्रक्रिया का विवरण नहीं है।

निष्कर्ष

दिल्ली का प्रदर्शन मछुआरा समुदाय को उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति श्रेणी के तहत मान्यता देने और उसके पारंपरिक रोजगार बहाल करने की मांग पर केंद्रित रहा। संजय निषाद ने समुदाय को जातियों के समूह के रूप में दर्ज करने की पैरवी की है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. मछुआरा समुदाय के सदस्यों ने प्रदर्शन क्यों किया?

उन्होंने अनुसूचित जाति श्रेणी में शामिल किए जाने की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन किया।

Q. संजय निषाद ने समुदाय के दर्जे को लेकर क्या कहा?

उन्होंने कहा कि समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची से हटाकर अनुसूचित जाति श्रेणी में दर्ज किया जाना चाहिए।

Q. उत्तर प्रदेश में समुदाय को किस रूप में मान्यता देने की मांग है?

मांग है कि इसे एक जाति नहीं, बल्कि जातियों के समूह के रूप में मान्यता दी जाए।

Q. संजय निषाद ने किस राज्य का उदाहरण दिया?

उन्होंने उत्तराखंड का उदाहरण दिया, जहां उनके अनुसार इसे जातियों के समूह के रूप में स्वीकार किया गया है।

Q. पारंपरिक रोजगार को लेकर क्या मांग रखी गई?

जलाशयों, नदी किनारों और नदियों से जुड़े मछुआरा समुदाय के पारंपरिक रोजगार बहाल करने की मांग की गई।