देहरादून में भाजपा पार्षद अमृता सिंह के घर हुई चोरी के मामले में आरोपी दिनेश सुनार की गिरफ्तारी को लेकर परिजनों ने सवाल उठाए हैं। पुलिस का दावा है कि दिनेश को 7 अक्टूबर को देहरादून से गिरफ्तार किया गया, जबकि उसके भाई मोहन सुनार और उसके साथ नैनीताल गए यात्रियों का कहना है कि उसे 1 अक्टूबर को ही पुलिस अपने साथ ले गई थी।

यह मामला 28-29 सितंबर की रात अमृता सिंह के घर हुई चोरी से जुड़ा है। दिनेश के भाई का आरोप है कि पुलिस ने उसे 1 अक्टूबर की सुबह नैनीताल के एक होटल से हिरासत में लिया और करीब 6 दिनों तक आधिकारिक गिरफ्तारी के बिना अपने पास रखा। पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया है।

यात्रियों ने नैनीताल से ले जाने का दावा किया

दिनेश उस समय कैंची धाम घूमने आए यात्रियों को टैक्सी से नैनीताल लेकर गया था। उसके साथ यात्रा करने वाली एक महिला ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि समूह 30 सितंबर को दिल्ली से रवाना हुआ था। 1 अक्टूबर की सुबह करीब 8:30 AM वे नैनीताल पार्किंग के पास पहुंचे।

महिला के अनुसार, झील के सामने स्थित विनायक होटल में कमरा देखने के दौरान 2-3 लोग वहां पहुंचे। उन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताया और सभी को तल्लीताल थाने ले गए। यात्रियों का दावा है कि उन्हें करीब 10 से 12 घंटे तक थाने में बैठाए रखा गया। बाद में यात्रियों को जाने दिया गया, लेकिन दिनेश को पुलिस अपने साथ ले गई।

यात्रियों के इस बयान के अनुसार, 1 अक्टूबर को दिनेश नैनीताल में मौजूद था और उसी दिन उसे पुलिस ने रोका। हालांकि, उसे किस आधार पर रोका गया और उस समय क्या कार्रवाई हुई, इसका विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।

परिवार ने गुमशुदगी की शिकायत की

मोहन सुनार का कहना है कि 1 अक्टूबर की रात करीब 8 बजे तक दिनेश को देहरादून लाया जा चुका था। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में दावा किया कि दिनेश को इंदिरा नगर चौकी में रखा गया। परिवार को शुरुआत में उसकी हिरासत की जानकारी नहीं दी गई, इसलिए उन्होंने कई थानों में संपर्क किया और गुमशुदगी की शिकायत भी दर्ज कराई।

परिजनों के अनुसार, उन्हें दिनेश से मिलने नहीं दिया गया और उसकी स्थिति कई दिनों तक स्पष्ट नहीं की गई। मोहन ने दिनेश की टैक्सी की जीपीएस लोकेशन भी सार्वजनिक की है। परिवार का दावा है कि गाड़ी कई दिनों तक देहरादून में खड़ी रही।

दिनेश के साथ काम करने वाले एक ट्रेवल कारोबारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि वह करीब 3 दिन तक देहरादून में रहकर दिनेश के लिए खाना और कपड़े चौकी तक पहुंचाता रहा। कारोबारी का दावा है कि चौकी या थाने के सीसीटीवी फुटेज से हिरासत की अवधि की जानकारी मिल सकती है।

3 लाख रुपये मांगने का भी आरोप

मोहन सुनार और ट्रेवल कारोबारी ने आरोप लगाया कि दिनेश को छोड़ने के लिए करीब 3 लाख रुपये मांगे गए थे। कारोबारी के अनुसार, जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने रकम देने पर दिनेश को सरकारी मुखबिर बनाकर पेश करने की बात कही थी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि source में नहीं है और पुलिस की ओर से इस दावे पर अलग से जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया है।

ट्रेवल कारोबारी ने दिनेश के पास से 27,500 रुपए बरामद होने के पुलिस दावे को भी गलत बताया। उनका कहना है कि दिनेश व्यावसायिक टैक्सी चलाता था और यात्रियों से ऑनलाइन भुगतान भी लेता था। उन्होंने उसके पास मिले 2 मोबाइल फोन को निजी और कामकाजी फोन बताया तथा जरूरत पड़ने पर बिल और अन्य दस्तावेज देने की बात कही।

दिनेश की भूमिका पर परिवार का दावा

मोहन सुनार के मुताबिक, आदित्य नाम का युवक दिनेश को नियमित रूप से टैक्सी की बुकिंग देता था। इसी बुकिंग के तहत दिनेश दिल्ली से हरिद्वार पहुंचा था। वहां हरकी पैड़ी के पास पार्किंग क्षेत्र में एक पुल के नीचे आदित्य और उसका साथी टैक्सी में बैठे। इसके बाद दिनेश दोनों को देहरादून लेकर आया।

परिवार और ट्रेवल कारोबारी का दावा है कि दिनेश दोनों युवकों को केवल बुकिंग के आधार पर एक जगह से दूसरी जगह ले जा रहा था। उनका कहना है कि उसे चोरी की कथित योजना की जानकारी नहीं थी। कारोबारी के अनुसार, दिनेश ने पुलिस को आदित्य की पहचान और उससे जुड़े संपर्कों की जानकारी देने में सहयोग किया था।

पुलिस ने आरोपों को बताया गलत

एसपी सिटी शेखर चंद्र सुयाल ने परिजनों के आरोपों को गलत बताया। उनका कहना है कि अमृता सिंह के घर चोरी का मामला गंभीर है और पुलिस ने जांच तथा सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल के बाद दिनेश को गिरफ्तार किया। पुलिस अधिकारी के अनुसार, दिनेश के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं और उसकी गिरफ्तारी 7 अक्टूबर को ही हुई।

इस तरह मामले में दिनेश को नैनीताल से 1 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने के परिजनों और यात्रियों के दावे तथा 7 अक्टूबर को देहरादून से गिरफ्तारी के पुलिस दावे के बीच स्पष्ट अंतर है। दिनेश की हिरासत की अवधि, कथित रकम मांगने और उसके पास से बरामदगी से जुड़े आरोपों पर जांच की स्थिति source में स्पष्ट नहीं है।

निष्कर्ष

अमृता सिंह के घर चोरी मामले में दिनेश सुनार की गिरफ्तारी की तारीख और हिरासत की अवधि को लेकर विवाद है। परिवार और यात्रियों ने 1 अक्टूबर से पुलिस हिरासत का दावा किया है, जबकि एसपी सिटी शेखर चंद्र सुयाल ने गिरफ्तारी 7 अक्टूबर को होने की बात कही है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. यह मामला किस घटना से जुड़ा है?

यह मामला देहरादून में भाजपा पार्षद अमृता सिंह के घर 28-29 सितंबर की रात हुई चोरी से जुड़ा है।

Q. दिनेश सुनार की गिरफ्तारी को लेकर विवाद क्या है?

परिजनों और यात्रियों का दावा है कि दिनेश को 1 अक्टूबर को नैनीताल से हिरासत में लिया गया था। पुलिस का कहना है कि उसे 7 अक्टूबर को देहरादून से गिरफ्तार किया गया।

Q. दिनेश के साथ नैनीताल गए यात्रियों ने क्या कहा?

यात्रियों के अनुसार, पुलिस उन्हें तल्लीताल थाने ले गई और करीब 10 से 12 घंटे बाद छोड़ दिया। उनका दावा है कि दिनेश को पुलिस अपने साथ ले गई।

Q. दिनेश के भाई ने क्या कार्रवाई की?

मोहन सुनार ने कई थानों में संपर्क किया और दिनेश की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने दिनेश की टैक्सी की जीपीएस लोकेशन भी सार्वजनिक की।

Q. क्या पैसे मांगने का भी आरोप है?

परिजनों और एक ट्रेवल कारोबारी ने दिनेश को छोड़ने के लिए करीब 3 लाख रुपये मांगने का आरोप लगाया है।

Q. पुलिस का आधिकारिक पक्ष क्या है?

एसपी सिटी शेखर चंद्र सुयाल ने आरोपों को गलत बताया और कहा कि दिनेश को पर्याप्त सबूतों के आधार पर 7 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया।

Q. दिनेश की भूमिका को लेकर परिवार का क्या कहना है?

परिवार और ट्रेवल कारोबारी का कहना है कि दिनेश यात्रियों को बुकिंग के आधार पर ले जा रहा था और उसे चोरी की कथित योजना की जानकारी नहीं थी।