देहरादून के रेंजर्स ग्राउंड में चल रहे सरस फूड फेस्टिवल में 100 से ज्यादा स्टॉल लगाए गए हैं। यहां उत्तराखंड के सभी जिलों के साथ देश के दूसरे राज्यों के खाद्य, प्राकृतिक और हस्तशिल्प उत्पाद एक जगह मिल रहे हैं। महिला स्वयं सहायता समूह अपने बनाए सामान को सीधे ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं।
फेस्टिवल में पहाड़ की पारंपरिक चटनी, दालें, चावल, अचार, शहद और ऊनी कपड़ों के साथ ताजा व्यंजन भी उपलब्ध हैं। कुछ स्टॉल संचालकों ने बताया कि बारिश के कारण ग्राहकों की आवाजाही और बिक्री प्रभावित हुई। हालांकि, कई समूहों को ग्राहकों से अपने उत्पादों की अच्छी प्रतिक्रिया भी मिल रही है।
उत्तरकाशी की सेब चटनी और पहाड़ी खाद्य सामग्री
उत्तरकाशी के मोरी क्षेत्र का जय मातृ शक्ति स्वयं सहायता समूह अपने स्थानीय उत्पादों के साथ फेस्टिवल में पहुंचा है। समूह की अध्यक्ष मंजू राणा के मुताबिक, स्टॉल पर मोरी की सेब चटनी 300 रुपए प्रति किलो की दर से उपलब्ध है। इसके अलावा पतियुड के पकौड़े, सिद्दू, सेलू और उड़द की दाल के पकौड़े भी रखे गए हैं।
समूह की महिलाएं हिलान्स के माध्यम से उत्तरकाशी का राजमा, लाल चावल, काला तिल और भट्ट की दाल भी बेच रही हैं। स्टॉल पर मल्टीग्रेन बिस्किट भी उपलब्ध हैं। मंजू राणा ने कहा कि ऐसे आयोजन महिलाओं को अपने उत्पादों की पहचान बनाने और ग्राहकों से सीधे जुड़ने का अवसर देते हैं।
चमोली के उत्पादों से जुड़ी 20-25 महिलाएं
चमोली के भू कृपा फार्म से जुड़े अभिषेक नेगी ने बताया कि प्रेमनगर के उम्मेदपुर स्थित इष्टदेव समूह के माध्यम से पहाड़ी दालें, लहसुन, अरसे, रोटाने, शहद, हल्दी और अचार तैयार किए जाते हैं। इन उत्पादों को तैयार करने में समूह से जुड़ी करीब 20-25 महिलाएं काम करती हैं।
अभिषेक नेगी के मुताबिक, फेस्टिवल में ग्राहकों की प्रतिक्रिया अच्छी है। लोग प्राकृतिक और हाथों से तैयार किए गए उत्पादों में रुचि दिखा रहे हैं। भू कृपा फार्म के उत्पाद ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं। ग्राहक फार्म के नाम से इंस्टाग्राम और फेसबुक पर संपर्क कर सकते हैं।
बुरांश से सीबकथॉर्न तक प्राकृतिक उत्पाद
सहसपुर ब्लॉक के कोटड़ा कल्याणपुर स्थित दूण गूसबेरी फार्म ने भी फेस्टिवल में अपना स्टॉल लगाया है। फार्म में आंवला, आम और नींबू उगाए जाते हैं। बुरांश और माल्टा गांव से लाए जाते हैं, जबकि सीबकथॉर्न लेह से मंगाया जाता है।
फार्म संचालिका ने बताया कि ग्राहकों की आवाजाही ठीक है, लेकिन प्राकृतिक उत्पादों की गुणवत्ता और कीमत का अंतर समझाना चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा कि बुरांश के उत्पाद में रंग और एसेंस की जगह बुरांश और खांड का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए ग्राहकों को उत्पाद की सामग्री और बनाने का तरीका समझाना पड़ता है, खासकर तब जब वे इसकी तुलना सस्ते विकल्पों से करते हैं। फार्म के उत्पाद वेबसाइट के जरिए भी खरीदे जा सकते हैं।
कालसी की 5 महिलाएं तैयार कर रहीं ऊनी सामान
देहरादून जिले के कालसी क्षेत्र के हरिपुर से आया हथकरघा महिला स्वयं सहायता समूह शॉल, महिलाओं और पुरुषों के लिए बास्केट यानी जैकेट तथा मौसम के अनुसार दूसरे ऊनी उत्पाद बेच रहा है। समूह की सदस्य नंदिनी ने बताया कि इसमें 5 महिलाएं हैं, जो ये सामान खुद तैयार करती हैं।
समूह का कारोबार फिलहाल घर से चलता है और वहां 3 दुकानें संचालित होती हैं। नंदिनी के अनुसार, बारिश के कारण पिछले कुछ दिनों में बिक्री प्रभावित हुई, लेकिन बाद में कुछ सुधार आया। समूह अब ऑनलाइन बिक्री शुरू करने की योजना बना रहा है।
बेरीनाग की महिलाएं परोस रहीं ताजा व्यंजन
पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग ब्लॉक के कोटना देवी स्वयं सहायता समूह की सदस्य विमला देवी भी स्टॉल लेकर पहुंची हैं। समूह की महिलाएं यहां मैगी, मोमोज, चाय और कॉफी समेत शाकाहारी व्यंजन तैयार कर रही हैं। उनका कहना है कि खाना स्टॉल पर ताजा बनाया जाता है।
विमला देवी ने बताया कि बारिश के कारण ग्राहकों की संख्या उम्मीद से कम रही। इसके बावजूद स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अलग-अलग मेलों में जाने और नए लोगों से मिलने का मौका मिला है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन महिलाओं को घर से बाहर निकलकर काम करने और आगे बढ़ने का अवसर देते हैं।
स्थानीय उत्पादों में ग्राहकों की रुचि
फेस्टिवल में पहुंचे देहरादून निवासी आलोक उनियाल ने कहा कि पहाड़ी उत्पाद खरीदने से गांव की महिलाओं को सहयोग मिलता है। उन्होंने स्थानीय और भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। पूनम अपने बच्चों के साथ पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद लेने पहुंचीं। उन्होंने बताया कि बच्चों को यहां के व्यंजन पसंद आ रहे हैं।
देहरादून के योगराज सिंह ने स्टॉल पर उपलब्ध खाने की तारीफ की और साफ-सफाई को अच्छा बताया। फेस्टिवल में झूले और मनोरंजन के दूसरे साधन भी हैं। इससे परिवारों को खरीदारी और खानपान के साथ मनोरंजन का अवसर मिल रहा है।
इस आयोजन में स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पाद नए ग्राहकों तक पहुंचाने का मंच मिल रहा है। कुछ सामान पहले से दुकानों पर बिकता है, कुछ ऑनलाइन उपलब्ध है और कई समूह डिजिटल बिक्री शुरू करने की तैयारी में हैं। स्टॉल संचालकों के अनुभव बताते हैं कि उत्पाद तैयार करने के साथ उसकी गुणवत्ता, कीमत और खासियत ग्राहकों को समझाना भी कारोबार का जरूरी हिस्सा है।
निष्कर्ष
देहरादून के सरस फूड फेस्टिवल में 100 से ज्यादा स्टॉल के जरिए पहाड़ी खाद्य सामग्री, प्राकृतिक उत्पाद, हस्तशिल्प और ताजा व्यंजन ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं। बारिश से कुछ समूहों की बिक्री प्रभावित हुई, लेकिन आयोजन ने महिला उद्यमियों को पहचान, सीधे ग्राहक संपर्क और नए बाजार का अवसर दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q. सरस फूड फेस्टिवल कहां चल रहा है?
देहरादून के रेंजर्स ग्राउंड में सरस फूड फेस्टिवल चल रहा है।
Q. फेस्टिवल में कितने स्टॉल लगाए गए हैं?
फेस्टिवल में 100 से ज्यादा स्टॉल लगाए गए हैं।
Q. मोरी की सेब चटनी की कीमत कितनी है?
मोरी की सेब चटनी 300 रुपए प्रति किलो की दर से उपलब्ध है।
Q. फेस्टिवल में किन उत्पादों की बिक्री हो रही है?
यहां खाद्य सामग्री, प्राकृतिक उत्पाद, हस्तशिल्प, ऊनी कपड़े और ताजा शाकाहारी व्यंजन बेचे जा रहे हैं।
Q. सीबकथॉर्न कहां से मंगाया जाता है?
दूण गूसबेरी फार्म के अनुसार, सीबकथॉर्न लेह से मंगाया जाता है।
Q. कालसी के हथकरघा समूह में कितनी महिलाएं हैं?
कालसी के हरिपुर स्थित हथकरघा महिला स्वयं सहायता समूह में 5 महिलाएं हैं।
Q. क्या फेस्टिवल में ताजा खाना भी मिल रहा है?
हां, बेरीनाग का कोटना देवी स्वयं सहायता समूह मैगी, मोमोज, चाय और कॉफी समेत ताजा शाकाहारी व्यंजन तैयार कर रहा है।
Q. क्या कुछ उत्पाद ऑनलाइन भी खरीदे जा सकते हैं?
हां, भू कृपा फार्म और दूण गूसबेरी फार्म के उत्पाद ऑनलाइन उपलब्ध हैं।











