पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी में गंभीर रूप से संकटग्रस्त लाल सिर वाला गिद्ध दिखाई दिया। मोनाल संस्था के सदस्यों ने इस दुर्लभ पक्षी को पातलथौड़ क्षेत्र में देखा। यह जगह समुद्र तल से करीब 2,650 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

कुमाऊंजागरण की रिपोर्ट के अनुसार, लाल सिर वाला गिद्ध मुनस्यारी की पहाड़ियों में नजर आया। इस पक्षी को देखना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति माना जाता है।

गिद्धों के लिए बड़ा खतरा रहा डिक्लोफेनाक

भारत में 1990 और 2000 के दशक के दौरान गिद्धों की संख्या लगभग खत्म होने तक पहुंच गई थी। इसका बड़ा कारण डिक्लोफेनाक बताया गया है। यह मवेशियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दर्द निवारक दवा है।

जब गिद्ध ऐसे मवेशियों के शव खाते थे, जिनके शरीर में डिक्लोफेनाक मौजूद होता था, तो दवा का असर उनके लिए घातक साबित होता था। इस वजह से देश में गिद्धों की आबादी पर गंभीर असर पड़ा।

गिद्ध मृत पशुओं के शवों को साफ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी कारण उन्हें प्रकृति की सफाई व्यवस्था का हिस्सा माना जाता है।

मुनस्यारी में लाल सिर वाले गिद्ध का दिखना इस प्रजाति के संरक्षण की जरूरत को भी सामने लाता है। यह घटना पहाड़ी क्षेत्र में मौजूद जैव विविधता और दुर्लभ पक्षियों की सुरक्षा के महत्व की याद दिलाती है।

निष्कर्ष

मुनस्यारी के पातलथौड़ में 2,650 मीटर की ऊंचाई पर लाल सिर वाले गिद्ध का दिखना स्थानीय जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण घटना है। गंभीर रूप से संकटग्रस्त इस पक्षी की मौजूदगी गिद्धों और उनके आवास की सुरक्षा की जरूरत को रेखांकित करती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. लाल सिर वाला गिद्ध कहां देखा गया?

लाल सिर वाला गिद्ध पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी क्षेत्र के पातलथौड़ में देखा गया।

Q. यह पक्षी कितनी ऊंचाई पर नजर आया?

यह पक्षी समुद्र तल से करीब 2,650 मीटर की ऊंचाई पर दिखाई दिया।

Q. गिद्ध को किसने देखा?

मोनाल संस्था के सदस्यों ने इस दुर्लभ पक्षी को देखा।

Q. लाल सिर वाले गिद्ध की स्थिति क्या है?

लाल सिर वाला गिद्ध गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति है।

Q. भारत में गिद्धों की संख्या क्यों घटी थी?

1990 और 2000 के दशक में डिक्लोफेनाक के असर से भारत में गिद्धों की संख्या लगभग खत्म होने तक पहुंच गई थी।

Q. गिद्ध प्रकृति के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?

गिद्ध मृत पशुओं के शवों को साफ करने में मदद करते हैं और प्रकृति की सफाई व्यवस्था का हिस्सा हैं।