अल्मोड़ा जिले में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी बढ़ती दिखाई दे रही है। सोबन सिंह जीना राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध बेस अस्पताल की मनोरोग ओपीडी में रोज 50 से अधिक नए और पुराने मरीज परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें औसतन 15 मरीज युवा वर्ग के होते हैं।

चिकित्सकों के अनुसार, युवाओं में नशा, कॅरिअर का दबाव, बेरोजगारी की चिंता, रिश्तों में उतार-चढ़ाव और सोशल मीडिया की आभासी दुनिया मानसिक तनाव बढ़ा रही है। बदलती जीवनशैली और सोशल मीडिया की लत के बीच युवाओं में अवसाद से जुड़े मामले भी बढ़ रहे हैं।

मानसिक स्वास्थ्य की यह चुनौती बच्चों और महिलाओं में भी देखी जा रही है। 5 से 14 वर्ष के बच्चों में एडीएचडी और ऑटिज्म जैसी मानसिक व व्यवहार संबंधी चुनौतियों के मामले सामने आ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी में इन बच्चों की संख्या अलग से नहीं बताई गई है।

गृहणियों और कामकाजी महिलाओं में भी मानसिक परेशानी के मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे के जन्म के बाद होने वाले हार्मोनल और सामाजिक बदलावों से पोस्टपार्टम डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। कई परिवार इसे सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

  • लगातार उदास रहना या अकेले रहने की इच्छा होना।
  • स्वभाव में अचानक बहुत ज्यादा चिड़चिड़ापन या गुस्सा आना।
  • भूख और नींद के सामान्य पैटर्न में अचानक बड़ा बदलाव होना।
  • किसी काम में मन न लगना या लगातार नकारात्मक विचार आना।

मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. वीना तेजन ने कहा कि मानसिक तनाव या व्यवहार में बदलाव दिखने पर उसे छिपाने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह और काउंसलिंग करानी चाहिए। उन्होंने युवाओं और बच्चों में बढ़ती परेशानी के पीछे बदलती जीवनशैली, सोशल मीडिया की लत और कॅरिअर के दबाव को अहम कारणों में शामिल किया।

हर वर्ष 10 अक्तूबर को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इससे जुड़ी सामाजिक भ्रांतियां दूर करने के लिए विशेष दिवस मनाया जाता है। इसके बावजूद अस्पताल की ओपीडी में रोज पहुंच रहे मरीज मानसिक स्वास्थ्य पर समय रहते ध्यान देने की जरूरत दिखाते हैं।

निष्कर्ष

अल्मोड़ा बेस अस्पताल की मनोरोग ओपीडी में रोज 50 से अधिक मरीजों का पहुंचना मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती चुनौती को सामने रखता है। युवाओं, बच्चों और महिलाओं में दिखने वाले बदलावों को नजरअंदाज करने के बजाय विशेषज्ञ से परामर्श और काउंसलिंग लेना जरूरी बताया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. बेस अस्पताल की मनोरोग ओपीडी में रोज कितने मरीज पहुंच रहे हैं?

बेस अस्पताल में मानसिक बीमारी के 50 से अधिक नए और पुराने मरीज रोज परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं।

Q. इनमें युवाओं की संख्या कितनी है?

ओपीडी आने वाले मरीजों में रोज औसतन 15 युवा शामिल होते हैं।

Q. बच्चों में किन मानसिक और व्यवहार संबंधी चुनौतियों के मामले सामने आ रहे हैं?

5 से 14 वर्ष के बच्चों में एडीएचडी और ऑटिज्म जैसी चुनौतियों के मामले सामने आ रहे हैं।

Q. युवाओं में मानसिक परेशानी बढ़ने के पीछे कौन से कारण बताए गए हैं?

नशा, कॅरिअर का दबाव, बेरोजगारी की चिंता, रिश्तों में उतार-चढ़ाव और सोशल मीडिया को प्रमुख कारणों में बताया गया है।

Q. महिलाओं में किस तरह की मानसिक परेशानी बढ़ रही है?

बच्चे के जन्म के बाद होने वाला पोस्टपार्टम डिप्रेशन महिलाओं में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है।

Q. मानसिक परेशानी के कौन से लक्षण नजरअंदाज नहीं करने चाहिए?

लगातार उदासी, अकेले रहने की इच्छा, अचानक चिड़चिड़ापन, नींद या भूख में बदलाव और नकारात्मक विचारों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

Q. मानसिक तनाव या व्यवहार में बदलाव दिखने पर क्या करना चाहिए?

ऐसी स्थिति में परेशानी छिपाने के बजाय विशेषज्ञ से परामर्श और काउंसलिंग कराने की सलाह दी गई है।